डेयरियों से बढ़ रहा नदियों में प्रदूषण, संकट में जीवनदायिनी मां नर्मदा; NGT के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

Narmada River Pollution From Dairies: जबलपुर की जीवनदायिनी नदियों पर प्रदूषण का संकट, परियट, गौर और हिरन नदी किनारे संचालित 150 से अधिक डेयरियों का अपशिष्ट नर्मदा के लिए बना खतरा
Narmada river pollution from dairies
डेयरियों से बढ़ रहा नदियों का प्रदूषण(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dairy Waste Increasing Pollution In Narmada River: जबलपुर की जीवनदायिनी नदियों को प्रदूषण से बचाने की कवायद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जबलपुर में नदी किनारे संचालित हो रही डेयरियों से निकलने वाला गोबर, गंदा पानी और अन्य अपशिष्ट नदियों के प्रदूषण की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। अब नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस मामले को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और नदी किनारे संचालित डेयरियों को जल्द से जल्द हटाकर निर्धारित डेयरी स्टेट में शिफ्ट करने की मांग की है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच का आरोप है कि परियट नदी के बाद अब गौर नदी में भी प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जबलपुर की परियट, गौर और हिरन नदियां क्षेत्र की प्रमुख सहायक नदियां हैं और इनका पानी आगे चलकर नर्मदा नदी में मिलता है। ऐसे में इन नदियों में पहुंचने वाला प्रदूषित पानी नर्मदा के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।

नदियों किनारे सालों से चल रही डेरियां

जानकारी के मुताबिक जबलपुर और आसपास नदी किनारे करीब 150 डेयरियां संचालित हो रही हैं जो कई सालों से नदियों में अपशिष्ट पदार्थ बहा रही हैं। इन डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट के उचित प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने पर गोबर और गंदा पानी जलस्रोतों तक पहुंच रहा है और यही वजह है कि इन नदियों का पानी किसी भी कार्य में उपयोग नहीं हो पा रहा। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी जबलपुर की कई डेयरियों के खिलाफ जल अधिनियम के तहत कार्रवाई की और दूषित जल के निवारण के निर्देश दिए।

50 एकड़ में बनाया गया आधुनिक डेयरी इस्टेट

नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए नदी किनारे संचालित डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद जबलपुर के खमरिया में डेयरी एस्टेट विकसित करने का प्लान बना जिसके बाद खमरिया में करीब 50 एकड़ जमीन आवंटित की गई। जगह उपलब्ध होने के साथ ही लगभग 9.99 करोड़ रुपये की राशि बुनियादी सुविधाओं के लिए स्वीकृत की गई। 24 फरवरी 2022 को खमरिया में प्रदेश के पहले डेयरी स्टेट का उद्घाटन किया गया। डेयरी इस्टेट में डेयरी संचालकों को एक स्थान पर सड़क, ड्रेनेज और दूसरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई। इसके अलावा डेयरी स्टेट में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गोबर गैस प्लांट जैसी व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई थी, ताकि डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग ऊर्जा और जैविक खाद बनाने में किया जा सके।

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डेयरियां शिफ्ट ना होने पर उठे सवाल

खमरिया में सुविधायुक्त डेयरी इस्टेट बनने के बाद भी सवाल यही है कि जब समाधान की व्यवस्था वर्षों पहले तैयार हो चुकी है, तो नदी किनारे चल रही डेयरियां अब तक पूरी तरह शिफ्ट क्यों नहीं हुईं? मंच के मुताबिक 68 डेयरियों के लिए जगह आवंटित किए जाने के बावजूद अब तक महज आधा दर्जन के आसपास डेयरियां ही शिफ्ट हो सकी हैं। यानी बड़ी संख्या में डेयरियां अभी भी पुराने स्थानों पर संचालित हो रही हैं और इसी वजह से नदियों में प्रदूषण का खतरा बना हुआ है।

मंच ने दी आंदोलन की चेतावनी

अब नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे संचालित डेयरियों को चिन्हित कर उन्हें निर्धारित डेयरी स्टेट में शिफ्ट कराया जाए और अपशिष्ट को नदियों में जाने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। मंच ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वह सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। यानी जबलपुर की नदियों को बचाने के लिए अब सवाल सिर्फ डेयरियों की शिफ्टिंग का नहीं, बल्कि परियट, गौर और हिरन के रास्ते नर्मदा तक पहुंच रहे प्रदूषण को रोकने का भी है। वर्षों से चली आ रही डेयरी शिफ्टिंग की योजना अब जमीन पर कितनी तेजी से लागू होती है, यही आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल होगा।

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