MP Transport Department News: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान परिवहन विभाग की नई कार्यप्रणाली को लेकर एक चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा पारदर्शी व्यवस्था और हाईवे पर ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के दावे किए गए थे, लेकिन विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने इन सभी दावों की पोल खोल दी है।
प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 जुलाई 2024 से राज्य के बॉर्डर पर संचालित 45 स्थायी चेकपोस्टों को बंद कर दिया था। इसके स्थान पर 12 जुलाई 2024 से नए 'रोड सेफ्टी एंड एनफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट' शुरू किए गए थे। सरकार का तर्क था कि इस नई व्यवस्था से चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और यातायात सुगम होगा।
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित उत्तर में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जो आंकड़े पेश किए, वे बेहद चौकाने वाले हैं:
इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार के राजस्व में सीधे तौर पर लगभग 60 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सदन में यह भी बताया कि चेकिंग अमले को बॉडी-वार्न कैमरे, ऑनलाइन चालान के लिए पीओएस मशीनें और स्पीड रडार गन जैसे हाई-टेक उपकरण दिए गए हैं, जिनकी निगरानी केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से होती है। हालांकि, विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये उपकरण केवल कागजी औपचारिकता साबित हो रहे हैं। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य 'रोड सेफ्टी' (सड़क सुरक्षा) सुनिश्चित करना था लेकिन इसके उलट चेकिंग पॉइंट्स बनने के बाद प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है। विधायक का आरोप है कि मैदानी अमले का ध्यान सड़क सुरक्षा पर न होकर केवल वाहनों से अवैध वसूली पर केंद्रित है।
आंकड़ों की पड़ताल बताती है कि वर्तमान में प्रत्येक चेकिंग पॉइंट से प्रतिमाह औसतन सिर्फ 7 लाख रुपए का राजस्व मिल रहा है। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रत्येक पॉइंट पर तैनात स्टाफ के वेतन, ईंधन, ढांचागत सुविधाओं और हाई-टेक उपकरणों के रखरखाव पर होने वाला मासिक खर्च इस आय से कहीं अधिक है।
यह भी पढ़ें: कैग रिपोर्ट पर जीतू पटवारी का सरकार पर हमला, बोले- विज्ञापन नहीं, आंकड़े बता रहे मध्य प्रदेश की सच्चाई
कम कमाई और अधिक खर्च के चलते विभाग अपने कर्मचारियों और संसाधनों का वास्तविक ब्योरा देने से बच रहा है। स्थिति यह है कि न तो सरकार को राजस्व मिल रहा है और न ही सड़क सुरक्षा बेहतर हो रही है। इसी को आधार बनाते हुए विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इस घाटे वाली और अव्यवस्था से भरी नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की है।
https://youtu.be/raheASbMOhE?si=S8IwQGguuX2PhRLS