MP में ई-अटेंडेंस पर घमासान: उदय प्रताप सिंह के बाद बहस तेज, शिक्षक संगठनों ने रखा अपना पक्ष

E-Attendance MP: मध्य प्रदेश में 1 जुलाई से ई-अटेंडेंस न होने पर वेतन कटौती का आदेश, शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के सख्त रुख से भड़के शिक्षक संगठन, कड़े विलेख की बहस तेज।
Debate over e-attendance system intensifies in Madhya Pradesh after Uday Pratap Singh's statement
उदय प्रताप सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Uday Pratap Singh Statement On E-Attendance: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस प्रणाली अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि प्रदेशभर के शिक्षक संगठन इसे व्यावहारिक समस्याओं से जुड़ा फैसला बताते हुए विरोध कर रहे हैं। इस बीच मंत्री उदय प्रताप सिंह के बयान ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

ई-अटेंडेंस पर मंत्री उदय प्रताप सिंह का सख्त रुख

बैतूल दौरे पर पहुंचे प्रदेश के मंत्री उदय प्रताप सिंह ने ई-अटेंडेंस प्रणाली का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक पूरे दिन मोबाइल फोन का उपयोग कर सकते हैं, तो मोबाइल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को परेशान करना नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनका यह बयान सामने आने के बाद ई-अटेंडेंस को लेकर बहस और तेज हो गई है।

शिक्षक संघ बोले- तकनीक से नहीं, व्यवस्था की खामियों से है परेशानी

प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था या तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मौजूदा ई-अटेंडेंस प्रणाली में कई व्यावहारिक समस्याएं हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क कमजोर रहता है, जिससे समय पर उपस्थिति दर्ज कराना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा कई स्कूलों में तकनीकी संसाधनों की कमी भी शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

1 जुलाई से लागू वेतन कटौती के आदेश का हो रहा विरोध

शिक्षक संगठनों की सबसे बड़ी आपत्ति 1 जुलाई 2026 से लागू उस आदेश पर है, जिसके तहत ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटौती का प्रावधान किया गया है। संगठनों का कहना है कि तकनीकी कारणों या नेटवर्क की समस्या के चलते यदि उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है, तो इसका खामियाजा शिक्षकों को वेतन कटौती के रूप में नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बढ़ सकता है टकराव

ई-अटेंडेंस को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच मतभेद लगातार गहराते नजर आ रहे हैं। एक ओर सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार का अहम कदम मान रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो यह मुद्दा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीति दोनों में बड़ा विषय बन सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम और शिक्षक संगठनों की आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।

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