मध्य प्रदेश में घटी स्कूलों की संख्या फोटो सोर्स- AI
भोपाल

MP में शिक्षा बजट बढ़ा, लेकिन घट गए स्कूल: सरकारी स्कूल बंद या मर्ज करने में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे

UDISE Plus Report 2025-26 : यूडाइस प्लस रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार MP में 2,426 सरकारी स्कूल बंद या मर्ज हुए। शिक्षा बजट 36,730 करोड़ पहुंचने के बावजूद स्कूलों की संख्या घटी।

सुधीर दंडोतिया, प्रीतेश जैन

MP Government School Merger : मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा की स्थिति को लेकर यूडाइस प्लस रिपोर्ट 2025-26 के आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों को बंद करने या दूसरे स्कूलों में मर्ज करने के मामले में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे है। प्रदेश में स्कूलों की संख्या घट रही है, जबकि दूसरी ओर स्कूल शिक्षा के बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में देशभर में कुल 4,791 सरकारी स्कूल बंद या दूसरे स्कूलों में मर्ज किए गए। इनमें अकेले मध्य प्रदेश के 2,426 स्कूल शामिल हैं। यानी देश में बंद या मर्ज किए गए सरकारी स्कूलों में करीब आधे से ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश के हैं। इस बदलाव के बाद देशभर में स्कूलों की कुल संख्या 2024-25 के 14,71,473 से घटकर 2025-26 में 14,66,682 रह गई है।

कम नामांकन को बताया जा रहा विलय का कारण

सरकारी स्कूलों को मर्ज करने के पीछे कम छात्र संख्या और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने का तर्क दिया जा रहा है। कम नामांकन वाले स्कूलों को आसपास के दूसरे स्कूलों में समायोजित किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया का असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब पढ़ाई के लिए पहले से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।

9 हजार करोड़ बढ़ा शिक्षा बजट

स्कूलों की संख्या घटने के बीच मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के बजट में बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2022-23 की तुलना में स्कूल शिक्षा का बजट करीब 9 हजार करोड़ रुपए बढ़कर 36,730 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ऐसे में स्कूलों के बंद या मर्ज होने और बजट में वृद्धि के बीच विरोधाभास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर बच्चे

बजट बढ़ने के बावजूद कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट में प्रदेश के ऐसे स्कूलों का भी उल्लेख है, जो स्थायी भवन के अभाव में संचालित हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर बच्चे जर्जर या अस्थायी भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में स्कूलों के विलय के साथ-साथ मौजूदा स्कूलों के भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं में सुधार की जरूरत भी सामने आती है।

मर्जर के बाद बच्चों को तय करनी पड़ रही ज्यादा दूरी

सरकारी स्कूलों के विलय का सबसे सीधा असर विद्यार्थियों की रोजमर्रा की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जिन स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया गया है, वहां पढ़ने वाले बच्चों को अब पहले की तुलना में ज्यादा दूरी तय करनी पड़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है।

छात्राओं की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है असर

स्कूल की दूरी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के साथ विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका है। लंबी दूरी, सुरक्षित आवागमन और परिवारों की आर्थिक परिस्थितियां उनके स्कूल छोड़ने की वजह बन सकती हैं। ऐसे में स्कूलों के विलय की नीति के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि बच्चों को नजदीक, सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक सुविधा मिलती रहे।

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