

Balaghat Bandh News : बालाघाट जिले के सुदूर ग्रामीण और बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच गुरुवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बालाघाट बंद का आह्वान किया। बंद का शहर में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सब्जी मंडी समेत कई संस्थान बंद हैं। संगठनों ने बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।
बंद के दौरान अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकान और अन्य आवश्यक एवं आपातकालीन सेवाओं को छूट दी गई है। संगठनों की ओर से लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करने की अपील की गई है। प्रशासन ने भी बंद को देखते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर आवश्यक इंतजाम किए हैं। शहर में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बंद के दौरान दोपहर में धरना और आमसभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और वक्ता बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं और पीड़ित परिवारों से जुड़ी मांगों को शासन-प्रशासन के सामने रखेंगे। इसके बाद संयुक्त रैली निकाली जाएगी, जो कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। यहां कलेक्टर को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मामला बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक से जुड़ा है, जहां बीते दिनों में मलेरिया, मिजल्स, कुपोषण, त्वचा संबंधी बीमारी और अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत की बात सामने आई है। सामाजिक संगठनों की ओर से कम से कम 29 बच्चों की मौत का दावा किया जा रहा है, जबकि प्रशासन फिलहाल नौ मौतों की पुष्टि कर रहा है। मौतों के वास्तविक कारणों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
बच्चों की मौत के पीछे कई संभावित कारण सामने आ रहे हैं। नक्सल प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं और टीकाकरण नहीं पहुंच पाना भी एक वजह माना जा रहा है। इसके अलावा दूषित पानी, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बच्चों की मौत के बाद जिला अस्पताल में उपचार और सुविधाएं नहीं मिलने के आरोप भी लगातार लगाए जा रहे हैं।
बढ़ते विरोध और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलव को पद से हटाने का फैसला लिया है। डिंडौरी के CMHO डॉ. मनोज पांडेय को बालाघाट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य विभाग में हुए इस बदलाव को बच्चों की मौत के मामले में प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
बच्चों की मौत के मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी प्रभावित बैगा परिवारों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया था। अब सामाजिक संगठनों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ जल्द और कड़ी कार्रवाई की जाए।