UCC Bill Passed In MP Vidhansabha: मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान भारी हंगामे और तीखी राजनीतिक बहस के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को पारित कर दिया गया। सदन में इस विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए मंत्री गौतम टेटवाल ने प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त गहमागहमी शुरू हो गई।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया। विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों और कुछ वर्गों को अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने मांग की कि आदिवासियों की तरह अल्पसंख्यक समुदाय को भी इस कानून से राहत दी जानी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार ने अभी तक देश भर में यूसीसी लागू नहीं किया है, तो मध्य प्रदेश में इसे इतनी जल्दबाजी में लाने की क्या आवश्यकता है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मांग की कि इस संवेदनशील बिल को जल्दबाजी में पास करने के बजाय प्रवर समिति (सिलेक्ट कमेटी) के पास भेजा जाना चाहिए ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। इसके साथ ही कांग्रेस विधायकों ने सदन में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए जोरदार नारेबाजी भी की।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विधेयक केवल सरकार का एकतरफा फैसला नहीं है, बल्कि लगभग 10 लाख नागरिकों के सुझावों और जनमत के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने इसे "एक देश, एक निशान, एक विधान, एक प्रधान" की भावना के अनुकूल बताया। मंत्री राकेश सिंह और अन्य भाजपा नेताओं ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता सभी के हित में है और इसका विरोध राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।
बहस के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल (आसंदी) के पास पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
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इस भारी हंगामे और शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही को पहले 10 मिनट और बाद में 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। स्थगन के बाद भी जब गतिरोध समाप्त नहीं हुआ, तो विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था के तहत विधेयक पर आगे की प्रक्रिया शुरू की।
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