

Indore Vijayvargiya's Strong Message: इंदौर के अहिल्या स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक अंदाज में नजर आए। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, "मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं, पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वह गलत और जो सही है, वह सही। 70 साल का हो गया हूं, यूं ही सठिया गया हूं। किसी को बुरा लगे तो लगे, मुझे फर्क नहीं पड़ता। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया और अब यह राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में साफ संकेत दिए कि वे अपनी बात बिना किसी दबाव या संकोच के रखते हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी के पीछे नहीं, बल्कि सामने अपनी राय रखते हैं। उनके इस बयान को उनकी बेबाक राजनीतिक शैली का विस्तार माना जा रहा है, जिसके लिए वे पहले भी जाने जाते रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस जारी है। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में किसी व्यक्ति या दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर उनके इस संदेश का इशारा किस ओर था।
इसी कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय ने स्कूली छात्राओं के साथ रक्षा बंधन का उत्साह भी साझा किया। उन्होंने छात्राओं के साथ ये बंधन तो प्यार का बंधन है गीत गुनगुनाया। इसके अलावा उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर नशे के खिलाफ सामाजिक संकल्प लेने की अपील भी की। कार्यक्रम में छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे आयोजन का माहौल भावनात्मक एवं उत्साहपूर्ण बना रहा।
लव जिहाद के मुद्दे पर विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर बेटियों से दोस्ती करते हैं और बाद में उनकी वास्तविक पहचान सामने आती है। उन्होंने युवतियों से अपील की कि वे किसी भी व्यक्ति से दोस्ती करने से पहले पूरी जानकारी और सतर्कता बरतें ताकि किसी तरह के धोखे का शिकार न हों।
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उत्तर प्रदेश में मौलाना के कथित विवादित बयान से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही है और संबंधित मामले में भी कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएंगे। वहीं, वंदे मातरम को लेकर प्रस्तावित विधेयक पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति का मंत्र है। उनके अनुसार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों ने इसी भावना से प्रेरणा लेकर देश के लिए बलिदान दिया था, इसलिए इसका अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।