राहुल गांधी समेत 12 विपक्षी नेताओं ने संयुक्त याचिका दाखिल की
याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए
विपक्ष ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की जांच मांगी
Supreme Court SIR Hearing: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत 12 विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से दायर संयुक्त रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू तथा डॉ. विवेक जोशी को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं।
WP(C) नंबर 1351/2026 के तहत दायर यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष संबंधित मामले के रूप में सूचीबद्ध की गई है। इसे सूची में आइटम 47.5 के तहत रखा गया है। यह मामला राकेश कुमार सिंह की उस मुख्य याचिका से जुड़ा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है।
यह संयुक्त याचिका 12 अक्टूबर को एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल की गई थी। याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत समेत अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग की फाइलें, बैठकों के मिनट्स और आधिकारिक नोटिंग्स तलब करने का अनुरोध किया है। उनका उद्देश्य यह पता लगाना है कि आयोग ने अपने फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए या नहीं। इसके अलावा, यह भी जांचने की मांग की गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने SIR प्रक्रिया के दौरान आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले किया था।
याचिका में कानूनी फॉर्म-6 में कथित बदलाव, ECINet और ERONet मतदाता सूची डेटाबेस के डिजाइन एवं संचालन तथा उचित नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है।
विपक्षी नेताओं ने हटाए गए मतदाताओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। इसके साथ ही, मतदाताओं के नाम हटाने के कारणों सहित बूथवार जानकारी सार्वजनिक करने का अनुरोध भी किया गया है।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य SIR की वैधता पर दोबारा सवाल उठाना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया मामले में SIR को बरकरार रखा था।
इससे पहले 15 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा था।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने गांधी के अदालत तक मार्च का उल्लेख किया। इस पर पीठ ने कहा, कोई भी न्यायपालिका को डरा नहीं सकता। हम कोई ऊंची जगह पर नहीं बैठे हैं। पीठ ने यह भी कहा कि वह एक याचिकाकर्ता से उसके व्यवहार के संबंध में सवाल करेगी। हालांकि, इस दौरान संबंधित व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया।
निर्वाचन आयोग ने मुख्य मामले में एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल कर इस आरोप से इनकार किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसले लिए थे। आयोग के मुताबिक, 24 जून, 2025, 27 अक्टूबर, 2025 और 14 मई, 2026 को जारी किए गए तीनों SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों के आधार पर जारी हुए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से फाइलों पर दर्ज टिप्पणियां आयोग के आधिकारिक फैसले नहीं मानी जा सकतीं।
हलफनामे में कहा गया है कि जरूरी मामलों में चुनाव आयुक्त इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपनी मंजूरी देते हैं, जिसे बाद में संबंधित फाइल पर दर्ज कर दिया जाता है। फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर आयोग ने कहा कि उसने इस फॉर्म में कोई संशोधन नहीं किया है, क्योंकि ऐसा करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। आयोग ने यह भी दलील दी कि याचिका एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे अपने आप में सबूत नहीं माना जा सकता।