

Maharashtra Voter List Special Intensive Revision SIR Extension: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद और विपक्ष के लगातार गंभीर आरोपों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग ने नागरिकों को बडी राहत दी है।
आयोग ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, संशोधन करने या दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दिया है। इसके साथ ही, संशोधित अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की नई तारीख 16 नवंबर तय की गई है।
हाल ही में महाराष्ट्र कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस, चोक्कलिंगम से मुलाकात की थी। इस दौरान मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर शंका जताई गई थी और पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरते जाने की पुरजोर मांग की गई थी।
विपक्ष के दबाव और आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने इस महत्वपूर्ण समयसीमा में विस्तार करने का निर्णय लिया है, जिससे अधिक से अधिक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग सुनिश्चित कर सकें।
प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अनमैप्ड या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस प्राप्त करने वाले नागरिकों को अब सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
इसके बजाय, बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) स्वयं मतदाताओं सूची के घर-घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे, जिससे बुजुगों, कामकाजी लोगों और दिव्यांगों को खासी सहूलियत होगी।
बेघर नागरिकों, दैनिक वेतन भोगी मजदूरों और शेल्टर होम में निवास करने वाले लोगों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा विशेष हेल्प डेस्क और सहायता शिविर लगाए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से मतदाता पंजीकरण और सूची में सुधार से जुड़ी हर संभव मदद प्रदान की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में सभी जिला प्रशासनों को कड़े निर्देश जारी किए हैं, इस बीच, आयोग ने स्पष्ट किया है कि कुल 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 7.72 करोड़ नाम वर्तमान प्रारूप सूची में शामिल हैं, जबकि 2.07 करोड़ नाम इस शुरुआती चरण में शामिल नहीं हो सके हैं।
दस्तावेजों के घर पर ही सत्यापन की व्यवस्था होने के कारण अब नागरिकों को ईआरओ या एईआरओ कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी, केवल कुछ असाधारण मामलों में ही ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प रखा गया है, जिसमें संबंधित परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य आसानी से हिस्सा ले सकेगा।