बिहार म्यूजियम, पटना सोर्स- (@supriyasahuias)
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बिहार म्यूजियम ने पेरिस के लूव्र और न्यूयॉर्क के द मेट को पछाड़ा, विश्व के टॉप 10 लिस्ट में शामिल

Bihar Museum Global Ranking: वर्थ अ जर्नी की वर्ल्ड्स 100 बेस्ट म्यूजियम्स 2026 सूची में बिहार संग्रहालय को विश्व स्तर पर नौवां और एशिया में पहला स्थान मिला है।

नितिन कुमार राय

Highlights

  • बिहार म्यूजियम ने विश्व के टॉप 10 की सूची में जगह बनाई

  • पेरिस के लूव्र और न्यूयॉर्क के द मेट को पीछे छोड़ा

  • पटना के बेली रोड में स्थित है बिहार म्यूजियम

Bihar Museum In TOP10: पटना स्थित बिहार म्यूजियम को 2026 में दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान मिला है। यात्रा मार्गदर्शिका 'वर्थ ​​अ जर्नी' द्वारा प्रकाशित इस सूची में भारत का यह एकमात्र संग्रहालय है। शीर्ष पांच संग्रहालयों में मेक्सिको सिटी का म्यूजियो नैशनल डी एंथ्रोपोलोजिया, मैड्रिड का म्यूजियो डेल प्राडो, डेनमार्क के हुमलेबेक स्थित लुइसियाना म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट, सेंट पीटर्सबर्ग का स्टेट हर्मिटेज म्यूजियम और वियना का कुन्स्टहिस्टोरिस्चेस म्यूजियम शामिल हैं।

बिहार संग्रहालय ने शीर्ष पांच में जगह बनाने के लिए पेरिस के लौवर और न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को पीछे छोड़ दिया। यह शीर्ष 10 में शामिल होने वाला एकमात्र एशियाई संग्रहालय भी है।

साल 2015 में उद्घाटन हुआ था

पटना के बेली रोड पर स्थित इस संग्रहालय में ऐतिहासिक कलाकृतियों, मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोक कला का उल्लेखनीय संग्रह है।

पटना म्यूजियम का उद्घाटन 2015 में हुआ था। इसका निर्माण वास्तव में इसलिए किया गया था ताकि पुराने पटना संग्रहालय में रखी कलाकृतियों को ठीक से प्रदर्शित किया जा सके। प्रित्जकर पुरस्कार विजेता जापानी वास्तुकार फुमिहिको माक ने मुंबई स्थित ओपोलिस आर्किटेक्ट्स के सहयोग से इस संरचना का डिजाइन तैयार किया।

संस्कृति और विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां

संग्रहालय में प्राचीन भारत से लेकर 1764 तक की कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं। दीर्घाओं को मौर्य काल से लेकर मुगल और सूर वंश तक के विभिन्न ऐतिहासिक काल के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

यहां एक बाल दीर्घा भी है, जिसमें पशु, लोक कला, संस्कृति और विज्ञान से संबंधित प्रदर्शनियां हैं। संग्रहालय की प्रवासी दीर्घा बिहार की भौगोलिक सीमाओं से परे उपस्थिति को दर्शाती है।

संग्रह की प्रमुख कृतियों में से एक मौर्य काल की दीदारगंज यक्षी है, जो प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है। यह 1917 में पटना के पास पाई गई थी।

सुबहर 10 बजे से शाम 5 बजे तक कर सकते हैं भ्रमण

संग्रहालय में कुषाण काल ​​की 'बुद्ध का जन्म' नामक मूर्ति वाली एक आयताकार शिला भी रखी है। इसके अलावा, पाल वंश की कुरकिहार बुद्ध की कांस्य प्रतिमा, कुरान की एक सचित्र पांडुलिपि और सूर वंश के सिक्के भी प्रदर्शित हैं। मुख्य गैलरी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती हैं। संग्रहालय के अंदर स्थित रेस्तरां रात 9 बजे तक खुला रहता है।

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