

65वें राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में महाराष्ट्र के तीन कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार।
नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किया।
महाराष्ट्र के रमेश थोराट, सिद्धार्थ शिंगाडे और प्रीतम देवस्कर को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में देशभर से 6,175 कलाकृतियों आई थी।
अंतिम 20 सर्वश्रेष्ठ कृतियों में महाराष्ट्र के 3 कलाकारों ने जगह बनाई।
Lalit Kala Akademi Award Winners Maharashtra Artists: कला और संस्कृति के क्षेत्र में देश का नाम रोशन करते हुए महाराष्ट्र के तीन प्रमुख कलाकारों ने 65वें राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार अपने नाम किया है। नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रमेश थोराट, सिद्धार्थ शिंगाडे और प्रीतम देवस्कर को इस सर्वोच्च कला सम्मान से सम्मानित किया।
इस विशेष पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और तीसरे 'प्रिंट बिनाले इंडिया' के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महाराष्ट्र का नाम रोशन करने वाले इन तीनों कलाकारों ने अलग-अलग कला माध्यमों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
रमेश विठ्ठल थोरात: इन्हें उनके ऑयल पेंटिंग चित्र 'अनटाइटल्ड - II' (Untitled - II) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
सिद्धार्थ शाहजीराव शिंगाडे: इन्हें मिक्स्ड मीडिया (Mixed Media) माध्यम में बनाई गई बेहतरीन कलाकृति ट्रीज (Trees) के लिए सम्मानित किया गया।
प्रितम मधुकर देवसकर: इन्हें प्रिंटमेकिंग विधा में बनाई गई कलाकृति 'ऑफ टाइम एंड द सिटी' के लिए इस राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया गया।
यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इस वर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिए देशभर के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला था। कुल 2,495 कलाकारों की 6,175 कलाकृतियां चयन समिति के पास आई थीं।
चयन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न हुई। प्रहले चरण में विशेषज्ञ चयन समिति ने पूरे देश से प्राप्त प्रविष्टियों में से प्रदर्शनी (Exhibition) के लिए केवल 270 सर्वोत्कृष्ट कलाकृतियों का चयन किया।
इसके बाद, अंतिम चरण में इन 270 कलाकृतियों में से गहन मूल्यांकन के बाद देश की 20 सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया। इन 20 में महाराष्ट्र के 3 कलाकारों ने जगह बनाई।
विभिन्न कला माध्यमों में महाराष्ट्र के इन तीन कलाकारों की कृतियों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होना राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का प्रतीक है। कला विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सम्मान से महाराष्ट्र राज्य के युवा कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रेरणा और मंच मिलेगा।