Congress Internal Rift: भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में आंतरिक मतभेद चल रहा है, जिसकी वजह से वह कमजोर होती जा रही है। बहुत जल्द पार्टी खत्म हो सकती है। उन्होंने मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि फर्जी, दोहरे और अवैध मतदाताओं को लेकर समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जाते रहे हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए तरुण चुघ ने बताया है, कि कांग्रेस पार्टी अब एक सशक्त राष्ट्रीय दल के रूप में नहीं, बल्कि विभिन्न गुटों, क्षेत्रीय समूहों और जातीय आधारों में बंटी हुई संरचना के रूप में दिखाई दे रही है। आपको यह भी बता दें, कि कांग्रेस में जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका घट रही है और यह भी नजर में आ रहा है कि अलग-अलग गुटों के बीच शक्ति प्रदर्शन की राजनीति बढ़ती जा रही है।
चुघ ने हाल ही में हुई एक कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा है, कि जिसमें गुजरात आतंकवादरोधी दस्ता द्वारा जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी की सराहना की गई। उन्होंने यह भी कहा है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति को अपना लिया है और इसी के साथ सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
तरुण चुघ ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अनुसूचित जाति नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अपेक्षित व्यवहार नहीं किया जा रहा है, जिससे असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस में आंतरिक स्तर पर असहमति और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा है, कि इससे पहले की सरकारों के दौरान आतंकवाद के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि मौजूदा सरकार में कठोर रुख अपनाया गया है। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले लोग या तो जेल में हैं या मारे जा चुके हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखें और जनता को भ्रमित करने वाली राजनीति से बचें।
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विपक्षी गठबंधन इंडी अलायंस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना मतलब व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। विशेष रूप से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को गलत बताया और कहा कि बिना ठोस सबूत के ऐसे आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाते हैं।