छत्तीसगढ़ के गांवों में धर्मांतरण विवाद का मामला सोर्स : AI जेनरेट
धमतरी

धमतरी में शव यात्रा पर हंगामा, गंगाजल पीकर परिवार ने कराया हिंदू रीति से अंतिम संस्कार

Dhamtari Religion Change Case : छत्तीसगढ़ के धमतरी में महिला का अंतिम संस्कार रोका गया। हंगामे के बाद परिवार ने गंगाजल पीकर दोबारा हिंदू धर्म अपनाया और अंत्येष्टि हुई।

ऐश्वर्या द्विवेदी

Chhattisgarh Village Conversion Dispute Case : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धर्मांतरित महिला का अंतिम संस्कार रोक दिया गया। गांव के लोगों ने ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार का कड़ा विरोध किया।

इसके बाद गांव में समाज के लोगों की लंबी बैठक आयोजित हुई। परिवार ने अपनी स्वेच्छा से वापस हिंदू धर्म अपनाने का फैसला किया। गंगाजल पिलाकर परिवार को समाज में शामिल कराया गया और अंत्येष्टि हुई।

अंतिम संस्कार पर गांव में हंगामा

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यह मामला रूद्री थाना क्षेत्र के भटगांव गांव का है। भटगांव के रहने वाले सुरेश ध्रुव ने धर्म बदल लिया था। उन्होंने करीब चार साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। रविवार चार अक्टूबर को उनकी पत्नी सरस्वती ध्रुव की मौत हो गई।

इसके बाद घरवाले अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। महिला के अंतिम संस्कार में शामिल होने से ग्रामीणों ने मना कर दिया। गांव वालों ने धर्मांतरण का विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। इसके चलते गांव में काफी विवाद की स्थिति बन गई।

समाज के बीच बुलाई गई बैठक

विवाद बढ़ता देख गांव में समाज के लोगों की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में गांव के बुजुर्ग और नागरिक शामिल हुए। स्थिति को संभालने के लिए संदीप अग्रवाल को भी बुलाया गया। संदीप अग्रवाल बजरंग दल के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं।

बैठक में परिवार से रीति-रिवाज मानने पर बातचीत हुई। संदीप अग्रवाल ने सुरेश ध्रुव के परिवार को अच्छे से समझाया। उन्होंने पुरानी परंपराओं और सामाजिक नियमों की जानकारी दी।

गंगाजल पिलाकर समाज में किया शामिल

काफी देर तक चली बातचीत के बाद सुरेश ध्रुव मान गए। उन्होंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया। सुरेश ने लिखित रूप से भी अपनी सहमति दे दी। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी दबाव के वापसी कर रहे हैं।

इसके बाद ग्रामीणों ने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। परिवार के सदस्यों को गंगाजल से नहलाया गया। उन्हें पवित्र गंगाजल भी पिलाया गया। इस तरह परिवार को दोबारा अपने समाज में शामिल किया गया।

हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार

लगभग एक घंटे तक यह पूरी प्रक्रिया चलती रही। सहमति बनने के बाद सभी विवाद शांत हो गए। इसके बाद सरस्वती ध्रुव का अंतिम संस्कार शुरू किया गया। पूरे विधि-विधान और हिंदू रीति-रिवाज से अंत्येष्टि पूरी हुई।

सुरेश ध्रुव ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से धर्म बदला था। अब वह कभी दोबारा किसी अन्य धर्म में नहीं जाएंगे। वह हमेशा अपने पुराने धर्म और नियमों का पालन करेंगे।

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