Pitru Paksha 2026: श्राद्ध में पिंड पर आखिर क्यों चढ़ाया जाता है गंगाजल? जानें इसका धार्मिक रहस्य

Pitru Paksha Mein Gangajal:पितृ पक्ष में श्राद्ध और पिंडदान पर गंगाजल अर्पित करने से पितरों को तृप्ति और शांति प्राप्त होती है। जानिए श्राद्ध में पिंड पर गंगाजल चढ़ाने का क्या धार्मिक महत्व है।
 Pitru Paksha Mein Gangajal Ka Mahatva
पितृ पक्ष में गंगाजल का महत्व(सौ.AI)
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Pitru Paksha Mein Gangajal Ka Mahatva: सनातन धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का शुभ समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और तर्पण अर्पण करने के लिए समर्पित माना गया है। यह शुभ समय भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलता है।

इन 16 दिनों में लोग अपने देवतुल्य पितरों की आत्मा की शांति और उनकी प्रसन्नता के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज का आयोजन करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि श्राद्ध में पिण्ड पर गंगाजल क्यों चढ़ाया जाता है ? आइए जानते है इस बारे में।

श्राद्ध में पिण्ड पर गंगाजल क्यों चढ़ाया जाता है ?

हिन्दू धर्म में श्राद्ध या पिंडदान के दौरान पिंड पर गंगाजल इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि गंगाजल को अत्यंत पवित्र, मोक्षदायी और देव-पितरों को तृप्त करने वाला माना गया है। धर्म ग्रथों में श्राद्ध या पिंडदान के दौरान पिंड पर गंगाजल चढ़ाने की कई वजह बताई गई है। जो इस प्रकार है-

पितरों को शांति मिलती है

धर्म ग्रथों में गंगाजल को अत्यंत पवित्र, मोक्षदायी और देव-पितरों को तृप्त करने वाला माना गया है। कहा जाता है कि,श्राद्ध या पिंडदान के दौरान पिंड पर गंगाजल चढ़ाने से पितरों की आत्मा को को शांति और तृप्ति मिलती है।

ऐसा माना जाता है कि इससे उनकी भटकती हुई आत्मा को शीतलता और सुकून प्राप्त होता है। इसलिए लोग श्राद्ध या पिंडदान के दौरान पिंड पर गंगाजल चढ़ाते है।

मोक्ष और मुक्ति

पिंड पर गंगाजल चढ़ाने से मृत आत्मा को मोक्ष और मुक्ति मिलती है। गंगा नदी को स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का पवित्र सेतु माना गया है। पिंडदान पर गंगाजल अर्पित करने से पितरों के सारे पाप धुल जाते हैं और उन्हें पुनرजन्म के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिलने की मान्यता है।

नकारात्मक ऊर्जा का होता नाश

गंगाजल की दिव्यता नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करती है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्पित किया गया पिंडदान पूरी तरह शुद्ध रूप में पितरों तक पहुँचे।

तर्पण का प्रतीक

तर्पण का अर्थ ही जल से तृप्त करना है। गंगाजल सबसे उत्तम और पवित्र जल है, इसलिए इसके प्रयोग से पूजा और पिंडदान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

 Pitru Paksha Mein Gangajal Ka Mahatva
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