Tej Pratap Yadav: एक ओर तेजस्वी यादव आगामी चुनावों को लेकर 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाल रहे हैं और एनडीए पर हमला बोल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव उनके अभियान को ही चुनौती देते नजर आ रहे हैं। अब ऐसे ही मामले में तेज प्रताप की नाराजगी देखने को मिली है।
शनिवार को जहानाबाद जिले के लखवार गांव में कुछ ऐसा हुआ, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। तेज प्रताप यादव मंच से भाषण दे रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद एक युवक ने नारा लगाया- "अबकी बार तेजस्वी सरकार"। यह सुनते ही तेज प्रताप भड़क उठे और उस युवक पर बरस पड़े। उन्होंने कहा, "फालतू बात मत करो। तुम आरएसएस के हो क्या? अभी पुलिस पकड़ कर ले जाएगी।"
तेज प्रताप ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि जनता की होती है। उन्होंने घमंड करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि घमंड करने वाला जल्दी गिरता है। उन्होंने नारा लगाने वाले को चेताया कि अगर नौटंकी करोगे तो रोजगार भी नहीं मिलेगा।
तेज प्रताप यादव 'जनता संवाद' कार्यक्रम के तहत घोसी विधानसभा पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने भावी प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगा। इस दौरान उन्होंने न केवल राज्य सरकार पर निशाना साधा बल्कि परोक्ष रूप से अपने ही छोटे भाई तेजस्वी यादव पर भी तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने भाई का भला नहीं कर सकता, वह राज्य के आम लोगों का क्या भला करेगा। अपने भाषण में तेज प्रताप यादव ने युवाओं के रोजगार की बात की और कहा कि यदि उनकी सरकार बनी तो युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को राजनीति से हटकर अपने जीवन और व्यवसाय पर ध्यान देना चाहिए।
तेज प्रताप ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अपने भाई तेजस्वी यादव पर व्यंग्य करते हुए कहा कि ये लोग अब यात्राएं निकाल रहे हैं जबकि वह पहले से ही यात्रा निकालते आ रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर भी निशाना साधा और उन्हें ‘बहरूपिया’ कहकर पुकारा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर उनकी टीम को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों को सावधान रहने की सलाह दी।
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इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि राजद में आंतरिक मतभेद अब खुले मंचों पर सामने आने लगे हैं। तेजस्वी जहां पार्टी के प्रमुख चेहरा बनकर विपक्ष को चुनौती दे रहे हैं, वहीं तेज प्रताप उनकी राह में रोड़े अटकाते दिखाई दे रहे हैं, जिससे पार्टी की एकता और रणनीति दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।