Shubham Kumar Compensation Dispute Father Appeal Rajnath Singh: बिहार के जहानाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल सैन्य हलकों बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां पूरा देश अपने वीर सपूत, शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के बलिदान को नमन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहीद का परिवार अपनों के ही व्यवहार से गहरे सदमे और आर्थिक संकट में है। शहीद शुभम कुमार के पिता ने अपनी बहू पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय और आर्थिक सहायता की मांग की है।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के शहीद होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। शुभम ही अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे और उनकी शहादत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया है। इसी बीच, सरकार की ओर से मिलने वाली मुआवजा राशि को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुभम के पिता, अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि उनके बेटे के बलिदान के बदले जो 21 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी गई, उसे उनकी कथित पत्नी श्रेया राय ने ले लिया और परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।
अमरेंद्र शर्मा के अनुसार, शुभम की शहादत की खबर सुनकर श्रेया राय उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से बिहार स्थित उनके गांव पहुंची थीं। उन्होंने शुभम के पार्थिव शरीर के साथ अंतिम संस्कार की रस्मों में भी भाग लिया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया। पिता का आरोप है कि श्रेया, पति के श्राद्धकर्म के संपन्न होने से पहले ही 21 लाख रुपये का चेक लेकर वापस चली गईं। पिता ने भावुक होते हुए कहा कि श्रेया को परिवार के साथ रुककर दुख बांटना चाहिए था, लेकिन उन्होंने केवल धन को प्राथमिकता दी।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू शादी की स्थिति को लेकर है। अमरेंद्र शर्मा का दावा है कि परिवार की योजना के अनुसार शुभम और श्रेया की शादी इसी साल नवंबर में होनी थी, लेकिन दादी के निधन के कारण इसे 2027 की होली तक के लिए टाल दिया गया था। पिता का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी कि शुभम और श्रेया ने कोर्ट मैरिज कर ली है। उन्होंने हुलासगंज के सीओ पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने परिवार को सूचित किए बिना चेक श्रेया को सौंप दिया।
अमरेंद्र शर्मा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने और गरीब परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और उनके पास अब जीवन यापन का कोई साधन नहीं बचा है।
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उन्होंने इसे अपने साथ हुआ एक बड़ा 'धोखा' करार दिया है। फिलहाल, सीओ ने पुष्टि की है कि नियमों के अनुसार चेक श्रेया राय को सौंपा गया है, लेकिन परिवार इस पूरी प्रक्रिया और श्रेया के व्यवहार से पूरी तरह असंतुष्ट है।