वंदे मातरम पर छिड़ा सियासी संग्राम, बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से क्यों की माफी की मांग?

Vande Mataram Controversy: बंकिम चंद्र के वंशज ने AICC कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' रोकने के विवाद पर सोनिया गांधी से माफी की मांग की। जानिए राष्ट्रीय गीत के अपमान का पूरा मामला।
Indira Gandhi asked to apologise, representative image
इंदिरा गांधी सोर्स- सोशल मीडिया
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Sonia Gandhi Vande Mataram Disrespect Row: देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर 'वंदे मातरम' को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल के भाजपा विधायक और 'वंदे मातरम' के रचयिता ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के सीधे वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।

कांग्रेस मुख्यालय में क्या हुआ?

सुमित्रो चटर्जी के अनुसार, जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था, तब वहां 'वंदे मातरम' के पूरे संस्करण को लेकर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। चटर्जी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता इस गीत को गा रहे थे, तब सोनिया गांधी के चेहरे पर स्पष्ट 'बेचैनी और नाराजगी' देखी गई। उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी ने इस गान को बीच में ही रोकने की बार-बार कोशिश की, जिसे चटर्जी ने 'एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना' करार दिया है।

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शहीदों के बलिदान का अपमान

बंकिम चंद्र के वंशज ने इस घटना को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि इसे लाखों शहीदों के बलिदान का गंभीर अपमान भी कहा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि एक देशभक्त और ऋषि बंकिम चंद्र के परिवार का सदस्य होने के नाते, वह इस घटना से गहरे दर्द और खालीपन को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में ऊर्जा भरी, आज स्वतंत्र भारत में उसी के प्रति 'असहिष्णुता' दिखाना शहीदों का अनादर है।

वंदे मातरम का गौरवशाली इतिहास

अपने पत्र के माध्यम से सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को इस गीत के ऐतिहासिक महत्व की याद भी दिलाई है। उन्होंने महान क्रांतिकारी अरबिंदो का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 'वंदे मातरम' को केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि 'देशभक्ति का धर्म' माना था। इसी मंत्र को दोहराते हुए खुदीराम बोस जैसे अनगिनत क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे बंगाल विभाजन के समय यह गीत आजादी की लड़ाई का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था।

इतिहास के पन्नों से याद दिलाए कई प्रसंग

चटर्जी ने अपने पत्र में कांग्रेस के ही पुराने अधिवेशनों का उल्लेख कर सोनिया गांधी को आईना दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि:

  • 1896 का कलकत्ता अधिवेशन: जहां स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत के 'जादुई शब्दों' को अपनी आवाज दी थी।

  • 1905 का बनारस अधिवेशन: जिसमें सरला देवी चौधरानी ने पूरा गीत गाया था।

  • 1909 का तिलक प्रसंग: जब राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 'वंदे मातरम' गाकर उनका हौसला बढ़ाया था।

  • 1938 का उस्मानिया विश्वविद्यालय आंदोलन: जहां छात्रों ने इसी गीत को अपनी राष्ट्रभक्ति का आधार बनाया था।

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माफी की मांग पर अड़े विधायक

सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से अपील की है कि वह इस कृत्य के लिए भारत के नागरिकों और विशेषकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगें। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' में बाधाओं को तोड़ने और लोगों के दिलों को छूने की शक्ति है, और इसका अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अब देखना यह है कि इस गंभीर आरोप और माफी की मांग पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

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