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पिता Ziaur Rahman की हत्या का इंसाफ! बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने 45 साल बाद कातिल को भेजा जेल

Ziaur Rahman Assassination: बांग्लादेश में 45 साल से फरार चल रहे पूर्व सेना मेजर मुजफ्फर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर 1981 में पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या का गंभीर आरोप है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Jul 17, 2026 | 01:41 PM

तारिक रहमान और जियाउर रहमान (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Ziaur Rahman Murder Case: पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के तहत बांग्लादेश में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने 45 साल से फरार चल रहे पूर्व सेना मेजर मुजफ्फर हुसैन को आखिरकार दबोच लिया है। उस पर पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की निर्मम हत्या में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है। यह गिरफ्तारी मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार की एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

साल 1981 में हुई इस दर्दनाक राजनीतिक हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। मुजफ्फर हुसैन पर आरोप है कि उसने ही राष्ट्रपति जियाउर रहमान पर सीधे गोलियां चलाई थीं। इतने सालों तक छिपने के बाद आखिरकार ढाका मेट्रोपॉलिटन डिटेक्टिव पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से देश की जनता में न्याय की उम्मीद एक बार फिर से पूरी तरह जाग गई है।

आधी रात को हुई गिरफ्तारी

पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार रात ढाका के बनानी डीओएचएस इलाके में छापेमारी की। इसी इलाके से आधी रात को पूर्व सेना मेजर मुजफ्फर हुसैन को पुलिस ने सुरक्षित गिरफ्तार किया। वह 45 सालों से अपनी पहचान छिपाकर कानून की नजरों से बचकर देश में ही रह रहा था। पुलिस की इस सफल कार्रवाई को बांग्लादेश के इतिहास में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

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सेना को सौंपा गया हत्यारा

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं को बहुत ही तेजी के साथ पूरा किया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फर हुसैन को अब सीधे बांग्लादेश सेना के हवाले कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उसका बाकी बचा हुआ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया पूरी की जा सके। सेना अब इस मामले में अपने नियमों के तहत आगे की सख्त कार्रवाई को तुरंत अंजाम देगी।

1981 का वो काला दिन

दस्तावेजों के मुताबिक, 30 मई 1981 को चटगांव सर्किट हाउस में जियाउर रहमान पर हमला हुआ था। उस रात सेना के कुछ मध्य स्तर के अधिकारियों ने सर्किट हाउस पर अचानक हमला कर दिया था। मुजफ्फर हुसैन ने ही पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान पर सीधे अपनी बंदूक से गोलियां चलाई थीं। इस खतरनाक हत्याकांड में उसके साथ कैप्टन मोसलेह उद्दीन भी सीधे तौर पर पूरी तरह शामिल था।

तारिक रहमान की बड़ी जीत

जियाउर रहमान सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी के बहुत ही सम्मानित संस्थापक और बड़े लोकप्रिय नेता थे। यह गिरफ्तारी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी सरकार की बहुत बड़ी कामयाबी है। सरकार ने छह महीने पहले ही जियाउर रहमान के हत्यारों को पकड़ने का कड़ा वादा किया था। इतने सालों बाद हुई इस अहम गिरफ्तारी से बीएनपी पार्टी को एक बहुत बड़ी राजनीतिक जीत मिली है।

छिपने के ठिकानों पर सस्पेंस

मुजफ्फर हुसैन इतने लंबे समय यानी 45 सालों तक कैसे और कहां छिपा रहा, यह बड़ा सवाल है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अभी तक इसके छिपने के ठिकानों की पूरी जानकारी नहीं जुटा पाई हैं। इतने सालों तक कानून की नजरों से बचकर रहना किसी बड़े नेटवर्क के बिना बिल्कुल संभव नहीं है। जांच एजेंसियां अब उन लोगों की भी तलाश कर रही हैं जिन्होंने इसे पनाह और भारी मदद दी थी।

यह भी पढ़ें: Russia Oil Tariff: रूसी तेल खरीदने पर भारत और चीन सहित 4 देशों को बड़ा झटका, 100% टैक्स की तैयारी में अमेरिका

कोर्ट मार्शल से न्याय की उम्मीद

देश की जनता और बीएनपी समर्थकों की नजरें अब सेना के कोर्ट मार्शल पर पूरी तरह टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि 45 साल बाद पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के हत्यारे को कड़ी सजा मिलेगी। बीएनपी पार्टी लंबे समय से अपने संस्थापक नेता की हत्या के दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रही है। अब यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि सेना की कानूनी प्रक्रिया में क्या अंतिम नतीजा आता है।

Ziaur rahman murder case former army major arrested in bangladesh

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Published On: Jul 17, 2026 | 01:41 PM

Topics:  

  • Bangladesh
  • Bangladesh political crisis
  • One person arrested
  • Tarique Rahman
  • World News

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