Russia Oil Tariff: रूसी तेल खरीदने पर भारत और चीन सहित 4 देशों को बड़ा झटका, 100% टैक्स की तैयारी में अमेरिका

Russia Oil Tariff: अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल भारी समर्थन के साथ पेश हुआ है। इस बिल के पास होने पर रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत और चीन पर 100% तक भारी टैरिफ लगेगा।
Russia Oil Tariff: US Bill Proposes 100 Percent Tax On Countries Buying Crude Oil 
रूसी तेल खरीदने पर 100% टैक्स की तैयारी में अमेरिका (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US On Russia Oil Tariff: अमेरिका ने एक बहुत ही सख्त कदम उठाया है जिससे दुनिया भर में खलबली है। अमेरिका में एक नए बिल को भारी समर्थन मिला है जिसका सीधा असर भारत और चीन पर पड़ेगा। 60 से अधिक अमेरिकी सीनेटरों ने इस बिल को अपनी अंतिम मंजूरी और भरपूर समर्थन दे दिया है। यह नया कानून उन सभी देशों पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाएगा जो रूस से तेल खरीदते हैं।

यह रूसी फंडिंग को पूरी तरह रोकने के लिए अब तक के सबसे कड़े और सख्त अमेरिकी कदमों में से एक है। 60 सीनेटरों की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस बिल के पास होने की संभावना काफी बढ़ गई है। इसके पास होने के बाद भारत, चीन, अजरबैजान और हंगरी जैसे बड़े देशों पर भारी टैरिफ लागू हो जाएगा। इस बिल को तैयार करने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम का इसी हफ्ते ही अचानक निधन हो गया है।

अमेरिका और यूरोपीय देशों को छूट

इस बिल में अमेरिका के यूरेनियम इंपोर्ट और उसके कुछ यूरोपीय सहयोगियों को खास छूट भी दी गई है। यह नया बिल 15 यूरोपीय खरीदारों को छूट देता है जो सीमित मात्रा में रूसी गैस खरीद रहे हैं। ये सभी देश अपने कुल गैस का 15 प्रतिशत से कम रूस से आयात करते हैं और विकल्प खोज रहे हैं। इसलिए रूस से गैस खरीदने वाले इन सभी यूरोपीय देशों पर किसी भी तरह का कोई नया टैरिफ नहीं लगेगा।

राष्ट्रपति के पास छूट देने का अधिकार

इस नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष अधिकार दिए गए हैं जिससे वे छूट दे सकते हैं। वे बिल के तहत लगभग किसी भी प्रतिबंध या टैरिफ से कुछ देशों को बड़ी छूट आसानी से दे सकते हैं। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस को इसकी सूचना देनी होगी और आपत्ति के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। हाल ही में सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अचानक निधन के बाद इस बिल का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ा है।

यूरेनियम खरीद पर विशेष छूट

रूस से गैस के अलावा इस बिल के तहत रूसी यूरेनियम खरीद पर भी अमेरिका ने पूरी छूट दी है। अमेरिका अपनी जरूरत का भारी मात्रा में यूरेनियम रूस से खरीदता है इसलिए उसे बाहर रखा गया है। रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम अमेरिकी न्यूक्लियर पावर प्लांट की बहुत बड़ी सप्लायर है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका रूस पर अपनी एनर्जी निर्भरता को पूरी तरह से खत्म नहीं करना चाहता।

12 महीने से तेल खरीदने वाले देश

इस बिल के सेक्शन 113 के तहत पिछले 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल के पांच सबसे बड़े इंपोर्टर्स पर नजर है। राष्ट्रपति को निर्देश है कि वे इन सभी देशों से इंपोर्ट होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएं। इस बिल का सबसे खास और प्रमुख टारगेट मुख्य रूप से चीन और भारत जैसे बड़े देशों को माना जा रहा है। यह बिल सीधे रूस से इंपोर्ट होने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार भी देता है।

रूस के संस्थानों पर कड़े प्रतिबंध

इस नए बिल में रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए और भी कई कड़े कदम उठाए गए हैं। इसमें क्रेमलिन के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व से जुड़े लोगों पर बहुत ही सख्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसके साथ ही रूस के सबसे बड़े बैंकों और डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस से जुड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाया जाएगा। इस कानून के जरिए अमेरिका रूस की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पंगु बना देना चाहता है।

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