चारों तरफ से घिरा यमन! एक साथ 3 देशों ने की स्ट्राइक, मिडिल ईस्ट में फिर मचा हाहाकार
Middle East war: यमन की राजधानी सना पर इजरायल, अमेरिका और सऊदी अरब ने एक साथ हमला किया है। ये अटैक हूती और अलकायदा के ठिकानों पर हुए हैं जिसके बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग भड़क उठी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
यमन में हमले की तस्वीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel Saudi America Yemen Attack: मिडिल ईस्ट की जंग एक बार फिर से भड़क उठी है। यमन पर एक साथ तीन बड़े देशों इजरायल, अमेरिका और सऊदी अरब ने हमला बोल दिया है। ये हमले सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों और अलकायदा के ठिकानों पर किए गए हैं। इन संगठनों को लंबे समय से क्षेत्र की अस्थिरता का कारण माना जाता रहा है।
इजरायल ने यमन की राजधानी सना पर ड्रोन और मिसाइल अटैक किए हैं। यह कार्रवाई हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के जवाब में की गई। हाल ही में इजरायल ने हूती के ऑपरेशनल कमांडर अल-लघारी की हत्या कर दी थी। इसके बाद से हूती संगठन ने पूर्ण लामबंदी का ऐलान करते हुए पूरे यमन में रेड अलर्ट जारी कर दिया था। इजरायली हमलों में अब तक 50 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे जा चुके हैं, जबकि 600 से अधिक नागरिकों की मौत की खबर है।
सऊदी अरब का हमला
इजरायल के बाद सऊदी अरब ने भी बुधवार 5 अक्टूबर को यमन के सादा प्रांत में मिसाइल अटैक किया। सऊदी हमले का लक्ष्य भी हूती के ठिकाने थे, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार रजीह सीमा जिले में नागरिक इलाकों पर भी मिसाइलें गिरीं। हालांकि, यमन प्रशासन ने अब तक किसी आधिकारिक हताहत आंकड़े की पुष्टि नहीं की है।
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अमेरिका की एंट्री
तीसरा और सबसे रणनीतिक हमला अमेरिका ने किया। यमन मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ड्रोन हमले में अलकायदा के वरिष्ठ कमांडर अबू मुहम्मद अल-सनानी की मौत हो गई। इस हमले ने यमन की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है।
क्यों बढ़ा यमन पर दबाव?
यमन रेड सी (लाल सागर) के किनारे बसा रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश है। यहां हूती विद्रोही लंबे समय से नियंत्रण में हैं और इन्हें ईरान का करीबी और प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। हाल ही में हूतियों ने अलकायदा के साथ गठबंधन की घोषणा की, जिससे इजरायल, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
बता दें कि हमास के कमजोर पड़ने के बाद अब मिडिल ईस्ट में ईरान का असर बनाए रखने की जिम्मेदारी हूती लड़ाकों पर आ गई है। यही वजह है कि इजरायल और सऊदी अरब यमन को ईरान के नए फ्रंट के तौर पर देख रहे हैं और वहां उसकी ताकत को तोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।
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ईरान से खुले समर्थन की अपील
यमन की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो चुकी है। राजधानी सना के ऊपर लगातार ड्रोन मंडरा रहे हैं और सीमाओं पर सेनाओं की तैनाती बढ़ा दी गई है। हूती अब ईरान से खुले तौर पर मदद की अपील कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ने अपने युद्धपोत रेड सी में भेज दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि यह सवाल उठने लगा है क्या मिडिल ईस्ट में अब एक और बड़ी जंग की शुरुआत होने वाली है?
