पैक्स सिलिका क्या है? अमेरिका ने भारत को दिया इसमें शामिल होने का न्योता (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Invites India To Pax Silica: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए अमेरिका ने एक बड़ी पहल की है। अमेरिका ने भारत को आधिकारिक रूप से पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। यह कदम दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है। भारत के शामिल होने से सिलिकॉन और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला काफी सुरक्षित और समृद्ध हो जाएगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अब पैक्स सिलिका के रूप में एक नई रणनीतिक साझेदारी उभरकर सामने आई है। अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने पुष्टि की है कि भारत को इस विशेष समूह में शामिल होने का न्योता दिया गया है। जल्द ही भारत सरकार इस महत्वपूर्ण समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर करेगी जिससे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते काफी बेहतर होंगे।
दिसंबर 2025 में शुरू की गई पैक्स सिलिका पहल का मुख्य उद्देश्य सिलिकॉन और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करना है। इसके साथ ही यह उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में एक मजबूत और समृद्ध नेटवर्क बनाती है। इस पहल में शामिल होने से भारत को भविष्य की उन्नत तकनीक और संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने खुलासा किया कि इस साझेदारी को लेकर भारत और अमेरिका के बीच जनवरी में ही सहमति बन गई थी। भारत के पास बड़ी खनन और प्रसंस्करण परियोजनाएं हैं जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। अमेरिका का मानना है कि भारत की युवा और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित जनसंख्या चीन के मुकाबले उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
पैक्स सिलिका पहल में वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जापान, इस्राइल, सिंगापुर, कतर, दक्षिण कोरिया, यूएई और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं। अब भारत को इस समूह में शामिल करके अमेरिका चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए एक बड़ा और मजबूत मंच तैयार कर रहा है। इस सहयोग से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और तकनीकी विकास को काफी बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है।
इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी करेगा या उन्हें पूरी तरह समाप्त कर देगा। बदले में अमेरिका भी भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत तक लाने पर पूरी तरह सहमत हो गया है। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक जटिलताओं को कम करने में भी बहुत मददगार होगा।
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अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि भारत जनसंख्या के मामले में सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता हुआ देश है। इन दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग करना कभी-कभी थोड़ा जटिल जरूर होता है लेकिन साझेदारी के अवसर असीमित हैं। पैक्स सिलिका के माध्यम से दोनों देश अपनी ताकत को साझा कर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भारत की तकनीकी क्षमता और प्रसंस्करण परियोजनाओं को देखते हुए अमेरिका उसे चीन के मुकाबले एक बेहतर और भरोसेमंद विकल्प मानता है। इस समझौते के लागू होने के बाद सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र में भारत की भूमिका वैश्विक स्तर पर काफी बढ़ जाएगी। यह साझेदारी आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा परिदृश्य को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाली साबित होगी।