ईरान इंटरनेट बंद, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Protest Latest News In Hindi: ईरान की सरकार एक ऐसे फैसले की ओर कदम बढ़ा रही है जिससे देश के आम नागरिकों का शेष विश्व से डिजिटल संपर्क लगभग पूरी तरह समाप्त हो सकता है। डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और सेंसरशिप पर नजर रखने वाली संस्था ‘फिल्टरवॉच’ के अनुसार, ईरान सरकार वैश्विक इंटरनेट को स्थायी रूप से बंद करने की एक योजना पर काम कर रही है। यदि यह योजना लागू होती है तो ईरान के अधिकांश नागरिक केवल सरकार द्वारा नियंत्रित ‘राष्ट्रीय इंटरनेट’ का ही उपयोग कर पाएंगे।
ईरान में इंटरनेट की वर्तमान स्थिति अत्यंत गंभीर है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 8 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इन प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा और हजारों लोगों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस वर्तमान इंटरनेट शटडाउन की गंभीरता की तुलना 2011 में मिस्र में हुए ऐतिहासिक तहरीर स्क्वायर आंदोलन से की जा रही है। सरकारी संकेतों की मानें तो 20 मार्च तक इंटरनेट पर यह पाबंदी जारी रहेगी लेकिन जानकारों का दावा है कि 2026 के बाद खुले इंटरनेट की वापसी की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
ईरान सरकार ने इंटरनेट को नियंत्रित करने के लिए ‘व्हाइटलिस्टिंग’ नामक तकनीक का सहारा लिया है। इस व्यवस्था के तहत, वैश्विक इंटरनेट केवल उन चुनिंदा लोगों को ही उपलब्ध कराया जाएगा जिन्हें सरकार की ओर से सुरक्षा मंजूरी प्राप्त होगी या जो सरकारी जांच में सफल होंगे। शोधकर्ताओं का दावा है कि ईरान इस निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए चीन की उन्नत तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिससे पूरे देश के इंटरनेट ट्रैफिक पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा सके।
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ईरान के इस कदम की वैश्विक स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारियों ने इस योजना को डराने वाली और अत्यंत महंगी करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल अलगाव से न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा बल्कि उसका दुनिया के साथ सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव भी पूरी तरह टूट जाएगा। हालांकि सरकार इसे नियंत्रण के साधन के रूप में देख रही है, लेकिन डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं की चेतावनी है कि लंबे समय में इसकी भारी कीमत देश की जनता को चुकानी पड़ेगी।