डोनाल्ड ट्रंप की जीत से क्यों चिढ़ गया चीन, ड्रैगन के रिएक्शन ने बयां की असली हकीकत, जानिए पूरी कहानी
अमेरिकी चुनाव 2024 में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। लेकिन ट्रंप की जीत से ड्रैगन यानी चीन को मिर्ची लग गई है। जिसका असर उसके रिएक्शन में साफ दिखाई दिया है।
- Written By: अभिषेक सिंह
डोनाल्ड ट्रंप व शी जिनपिंग (सोर्स-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: अमेरिकी चुनाव 2024 में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा 270 पार कर लिया है। डोनाल्ड ट्रंप की अपनी महिला प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दूसरी जीत है। अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी चीन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। जिससे साफ पता चलता है कि चीन चिढ़ा हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप क की जीत पर रिपब्लिक ऑफ चाइना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये अमेरिका का आंतरिक मामला है और इसको सामान्य तरीके से निपटा जाएगा। चीन की निपटने की बात से यह साफ संदेश निकल रहा है कि उसे ट्रंप की जीत रास नहीं आ रही है। इसके पीछे एक कारण भारत भी है।
ट्रंप की जीत पर ‘ड्रैगन’ का रिएक्शन
चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव “एक आंतरिक मामला” है और वे “अमेरिकी लोगों की पसंद का सम्मान करते हैं।” मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने आधिकारिक नतीजों से पहले कहा कि चीन “पारस्परिक सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और जीत-जीत सहयोग के सिद्धांतों के तहत चीन-अमेरिका संबंधों का निरीक्षण और संचालन करना जारी रखेगा।”
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आयात टैरिफ की बात पर भड़के प्रवक्ता
चीन से इंपोर्ट पर 60% टैरिफ लगाने के ट्रंप के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर माओ ने कहा “हम काल्पनिक सवालों पर किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करते हैं।” इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या चीनी नेता शी जिनपिंग डोनाल्ड ट्रंप के चुने जाने पर उन्हें बधाई संदेश भेजेंगे, उन्होंने कहा “हम प्रासंगिक मामलों से सामान्य तरीके से निपटेंगे।”
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आपको बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच हमेशा ही तनातनी देखने को मिलती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर हमेशा से ही विरोधाभास देखने को मिला है। अमेरिका और चीन की यह तनातनी अरसे से जग जाहिर है।
मोदी-ट्रंप की नजदीकी
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप से भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजदीकी के चलते भी चीन को ट्रंप की जीत खल रही होगी। क्योंकि भारत और चीन के बीच गतिरोध आम बात है और भविष्य में यदि ऐसा कुछ होता है तो अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ट्रंप भारत के फेवर में खड़े दिखाई दे सकते हैं।
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