Trump Iran Attack: ट्रंप ने टाला ईरान पर आज होने वाला सैन्य हमला, शांति वार्ता को दिया एक और मौका
Trump Iran Attack: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच राहत देने वाली खबर आई है। खाड़ी देशों की शांति अपील के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल के लिए टाल दिया है।
- Written By: प्रिया सिंह
शांति वार्ता के लिए ईरान पर हमला रुका (सोर्स-सोशल मीडिया)
Trump Iran Attack Postponed: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के लिए एक बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आज होने वाले अपने प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल के लिए रोक दिया है। ट्रंप ने यह अहम फैसला कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं की विशेष अपील के बाद लिया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन खाड़ी देशों ने उनसे सैन्य कार्रवाई टालने का बहुत ही ज्यादा आग्रह किया था। उनका कहना था कि अभी ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है, इसलिए हमले को रोकना चाहिए। ट्रंप ने शांति वार्ता को एक मौका देने के लिए हमले की योजना को रोक दिया है।
ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी
ट्रंप ने हमले को टालते हुए ईरान को बहुत ही सख्त चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका पूरी ताकत से बड़ा हमला करेगा। उन्होंने रक्षा मंत्री और अमेरिकी सेना को किसी भी स्थिति के लिए हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। पिछले कई महीनों से कतर, सऊदी अरब और यूएई खुद ईरान के हमलों का खतरा झेल रहे हैं।
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ईरान का कहना है कि ये हमले उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हैं जो इन सहयोगी देशों में स्थित हैं। ऐसे में इन तीनों खाड़ी देशों का एक साथ अमेरिका से किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप को रोकने की अपील करना बेहद अहम है। इससे मध्य पूर्व में फिलहाल किसी भी बड़े युद्ध या टकराव का खतरा टल गया है।
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थता की भूमिका
इस पूरे विवाद में पाकिस्तान भी अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका को ईरान का एक संशोधित 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव सौंपा है। ईरान ने भी इस बात की पूरी पुष्टि की है कि उसकी नई शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचा दी गई हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा और मुख्य विवाद अब भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर ही बना हुआ है। ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन का अधिकार पूरी तरह से छोड़ने को किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है। वहीं अमेरिका चाहता है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बहुत ही कड़ी और व्यापक निगरानी रखी जाए।
