ईरान का खार्ग आइलैंड, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Why Kharg Island Oil Terminal Not Attacked By US Israel: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण गोलाबारी के बीच एक सवाल पूरी दुनिया के जहन में है आखिर अमेरिका और इजरायल ने अब तक ईरान के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक ठिकाने, खार्ग आइलैंड (Kharg Island) को निशाना क्यों नहीं बनाया है? जबकि अमेरिका अब तक ईरान और उसके आसपास के लगभग 5,000 ठिकानों पर बमबारी कर चुका है लेकिन यह रणनीतिक द्वीप अब भी अछूता है।
खार्ग आइलैंड महज एक द्वीप नहीं बल्कि ईरान की आर्थिक रीढ़ है। ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी टर्मिनल के जरिए दुनिया भर में भेजा जाता है। यह पांच मील लंबा मूंगा द्वीप (Coral Island) मुख्य भूमि से 27 मील दूर फारस की खाड़ी में स्थित है। यहां ईरान के मध्य और पश्चिमी तेल क्षेत्रों से पाइपलाइनें आकर समाप्त होती हैं। खार्ग आइलैंड की सबसे बड़ी विशेषता इसके पास मौजूद गहरा पानी है, जो विशाल तेल टैंकरों (VLCC) को लंगर डालने की सुविधा देता है जबकि ईरान का बाकी तट इसके लिए बहुत उथला है।
रक्षा विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने का मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘अंधे कुएं’ में धकेलना। चैथम हाउस थिंकटैंक के नील क्विलियम के अनुसार, यदि खार्ग पर हमला होता है तो सोमवार को 120 प्रति बैरल डॉलर पर चल रही तेल की कीमतें सीधे 150 प्रति बैरल डॉलर तक पहुंच सकती हैं। पहले से ही ईरानी जवाबी कार्रवाई के डर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में टैंकरों की आवाजाही प्रभावित है, जिससे तेल की कीमतें 20 प्रति बैरल डॉलर पहले ही बढ़ चुकी हैं।
व्हाइट हाउस के गलियारों में खार्ग आइलैंड को ‘जब्त’ करने की चर्चाएं भी चल रही हैं। पेंटागन के पूर्व सलाहकार माइकल रुबिन का तर्क है कि अगर ईरान अपना तेल नहीं बेच पाएगा तो वह अपने कर्मचारियों और सेना को वेतन (Payroll) भी नहीं दे पाएगा, जिससे शासन आर्थिक रूप से पंगु हो जाएगा। हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने जमीनी सेना के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है लेकिन इतने बड़े द्वीप पर कब्जा करना एक बहुत ही जटिल और जोखिम भरा सैन्य ऑपरेशन होगा।
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विशेषज्ञों का कहना है कि खार्ग के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को ठीक करने में कई साल लग सकते हैं। इसके अलावा, इसे नष्ट करने से भविष्य में ईरान में आने वाली किसी भी नई सरकार के पास राजस्व का कोई साधन नहीं बचेगा, जो राजनीतिक रूप से आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। फिलहाल, ईरान ने हमले की आशंका में यहां से होने वाले निर्यात को 30 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ा दिया है और 1.8 करोड़ बैरल का बैकअप स्टॉक भी जमा कर लिया है।