वियतनाम में ‘द सेकंड यूएस इन्वेजन प्लान’ का खुलासा; क्या फिर होगी अमेरिका से जंग? सेना की चल रही गुप्त तैयारी
Vietnam US War Preparation: वियतनाम के एक आंतरिक सैन्य दस्तावेज से पता चला है कि वहां की सेना अमेरिका को एक 'खतरा' मानती है और भविष्य में किसी संभावित अमेरिकी हमले के लिए गुप्त तैयारी कर रही है।
- Written By: अमन उपाध्याय
वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की महासचिव तो लाम और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
US Vietnam Relations News Hindi: वियतनाम और अमेरिका के बीच पिछले साल रिश्तों में आई ऐतिहासिक सुधार की खबरों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक आंतरिक सैन्य दस्तावेज से यह बात सामने आई है कि वियतनाम की सेना अमेरिका को एक ‘बेलिजरेंट’ शक्ति मानती है और एक संभावित अमेरिकी युद्ध की तैयारी कर रही है।
यह रिपोर्ट मानवाधिकार संगठन ‘द 88 प्रोजेक्ट’ द्वारा जारी की गई है जो वियतनाम के भीतर चल रही सैन्य और राजनीतिक हलचलों का विश्लेषण करती है।
‘द सेकंड यूएस इन्वेजन प्लान’
अगस्त 2024 में वियतनाम के रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस दस्तावेज का शीर्षक ‘द सेकंड यूएस इन्वेजन प्लान’ रखा गया है। यह दस्तावेज सुझाव देता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी चीन को रोकने के लिए अपरंपरागत युद्ध और सैन्य हस्तक्षेप का सहारा ले सकते हैं। दस्तावेज में चेतावनी दी गई है कि जो देश अमेरिकी ‘कक्षा’ से बाहर जाते हैं उन पर बड़े पैमाने पर आक्रमण किया जा सकता है।
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वियतनामी सैन्य योजनाकारों का मानना है कि भले ही वर्तमान में युद्ध का जोखिम कम हो लेकिन अमेरिका के ‘लड़ाकू स्वभाव’ को देखते हुए उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है ताकि वॉशिंगटन हमले के लिए कोई ‘बहाना’ न बना सके।
‘कलर रिवोल्यूशन’ का डर
रिपोर्ट के लेखक बेन स्वैंटन के अनुसार, वियतनामी नेतृत्व के भीतर यह केवल एक विचार नहीं बल्कि पूरी सरकार में एक सहमति है। हनोई को सबसे बड़ा डर कलर रिवोल्यूशन का है जैसे कि 2004 में यूक्रेन की ऑरेंज रिवोल्यूशन या फिलीपींस की येलो रिवोल्यूशन हुई थी। वियतनामी सेना का मानना है कि अमेरिका मानवाधिकारों, लोकतंत्र और धर्म के मूल्यों को थोपकर वहां की समाजवादी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहता है।
अमेरिका से अस्तित्व का खतरा
दिलचस्प बात यह है कि वियतनाम के लिए चीन एक क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी तो है लेकिन वे उसे अमेरिका की तरह ‘अस्तित्वगत खतरा’ नहीं मानते। नेशनल वॉर कॉलेज के प्रोफेसर जाचरी अबुजा का कहना है कि चीनी जानते हैं कि वे वियतनाम को एक हद तक ही दबा सकते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वियतनामी सरकार कमजोर दिखी तो वहां जनविद्रोह हो सकता है। दूसरी ओर वियतनामी सेना की यादें 1975 में खत्म हुए अमेरिकी युद्ध से अभी भी जुड़ी हुई हैं।
ट्रंप और टू लैम के बीच नया समीकरण
वियतनाम के शक्तिशाली नेता टू लैम ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है। ट्रंप के पारिवारिक व्यवसाय ने वियतनाम के हुंग येन प्रांत में 1.5 बिलियन डॉलर के गोल्फ रिज़ॉर्ट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है।
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हालांकि, लैटिन अमेरिका में ट्रंप की नीतियों और क्यूबा जैसे सहयोगियों के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर वियतनामी रूढ़िवादी अभी भी डरे हुए हैं। वियतनाम के लिए अमेरिका उसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है जबकि चीन सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार, ऐसे में हनोई के लिए यह एक कठिन कूटनीतिक संतुलन बनाने की चुनौती है।
