BLA के हमलों से घबराया ड्रैगन! ग्वादर में चीन के सभी प्रोजेक्ट्स पर लगा ताला, वापस बुलाए जा रहे नागरिक
China Gwadar Project Halt: बलूचिस्तान में BLA के बढ़ते हमलों के बाद चीन ने ग्वादर से अपने नागरिकों को निकालने और सभी प्रोजेक्ट्स को अस्थायी रूप से रोकने का बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
बलूचिस्तान हिंसा चीन का ग्वादर प्रोजेक्ट रुका, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Balochistan Violence News In Hindi: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा हालात बेकाबू होते देख चीन ने एक बेहद बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हालिया हमलों से घबराकर चीन ने ग्वादर में चल रहे अपने सभी जमीनी प्रोजेक्ट्स को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इतना ही नहीं, चीन ने वहां मौजूद अपने सभी नागरिकों जिनमें इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ को विशेष उड़ानों के जरिए वापस बुलाना शुरू कर दिया है।
चीन ने ग्वादर को क्यों किया खाली?
सुरक्षा और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, ग्वादर में अब एक भी चीनी नागरिक मौजूद नहीं रहेगा। हाल के दिनों में बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाकर कई हमले किए गए हैं। इन हमलों के कारण चीनी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर बीजिंग में गहरी चिंता पैदा हो गई है। इसी को देखते हुए चीन ने अपने स्टाफ को तुरंत वहां से निकालने का आदेश दिया।
क्या खतरे में है CPEC का भविष्य?
चीन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह से अस्थायी और एहतियाती है। इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि चीन ग्वादर या चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से पूरी तरह पीछे हट रहा है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा हालात की पूरी समीक्षा करने के बाद ही काम फिर से शुरू किया जाएगा। फिलहाल के लिए स्थानीय पाकिस्तानी स्टाफ ऑन-ग्राउंड काम को संभालेगा जबकि चीनी टीमें दूर से इसकी निगरानी करेंगी।
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पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष सैन्य बल के गठन की घोषणा की थी। हालांकि, इस बल के प्रभावी होने से पहले ही बीएलए ने चीनी कैंप पर हमला बोल दिया। आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक पाकिस्तान में चीन के 20 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
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ग्वादर चीन की रणनीतिक और व्यापारिक योजनाओं का एक बेहद अहम हिस्सा है लेकिन बलूचिस्तान में लगातार बढ़ती हिंसा ने बीजिंग और इस्लामाबाद दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चीनी कर्मियों की वापसी अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि पाकिस्तान नए सुरक्षा इंतजामों को कितना कारगर बना पाता है और वहां के हालात कब तक सामान्य होते हैं।
