अमेरिका बनाम रूस यूरोप सैन्य शक्ति, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
America Russia Europe War Analysis: मौजूदा वैश्विक हालातों में जिस तरह से अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं, उसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें जहां ग्रीनलैंड पर टिकी हैं, वहीं फ्रांस, इटली और जर्मनी जैसे देश अब रूस के साथ संबंधों को सुधारने के संकेत दे रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि एक तरफ अमेरिका हो और दूसरी तरफ रूस एवं तुर्की को छोड़कर NATO के बाकी देशों का एक असंभव गठबंधन हो, तो सैन्य शक्ति के मामले में किसका पलड़ा भारी होगा।
अमेरिका की आर्थिक बादशाहत सैन्य शक्ति की तुलना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा बजट होता है। यहां अमेरिका का कोई मुकाबला नहीं है। अमेरिका का अकेले का रक्षा बजट 935 से 997 बिलियन डॉलर के बीच है। यह बजट पूरे यूरोप और रूस के कुल सैन्य बजट (लगभग 635 बिलियन डॉलर) से कहीं अधिक है। रूस ने हाल के वर्षों में अपना बजट बढ़ाया हैफिर भी यह गठबंधन अमेरिका के बजट का केवल 65-70 प्रतिशत ही कवर कर पाता है।
रूस और यूरोप का पलड़ा भारी जमीन पर आमने-सामने की लड़ाई की बात करें तो रूस और यूरोप का गठबंधन अमेरिका पर भारी पड़ता दिखता है। रूस के पास अकेले 13 लाख सक्रिय सैनिक हैं, और यूरोप के सैनिकों को मिलाकर यह संख्या 31 लाख तक पहुंच जाती है, जबकि अमेरिका के पास करीब 13 लाख सक्रिय सैनिक हैं। टैंकों के मामले में भी यह गठबंधन बहुत आगे है। रूस और यूरोप के पास कुल मिलाकर करीब 14,000 मेन बैटल टैंक हैं जबकि अमेरिका के पास केवल 4,600 टैंक हैं।
अमेरिका की बादशाहत जैसे ही जंग आसमान या समुद्र की तरफ बढ़ती है, कहानी पूरी तरह बदल जाती है। अमेरिका के पास कुल 13,200 एयरक्राफ्ट हैं, जबकि रूस-यूरोप गठबंधन के पास महज 7,700 ही हैं। अमेरिका के पास F-22 और F-35 जैसे 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स की बड़ी संख्या है, जबकि यूरोप अब भी मुख्य रूप से 4.5 पीढ़ी के विमानों पर निर्भर है।
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समुद्र में भी अमेरिका का दबदबा है जिसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं जबकि विरोधी गठबंधन के पास केवल 6 हैं। अमेरिका की सभी 64 सबमरीन परमाणु शक्ति से लैस हैं जबकि गठबंधन के पास मौजूद 120 सबमरीन में डीजल और परमाणु दोनों का मिश्रण है।
विनाशकारी संतुलन परमाणु हथियारों के मामले में रूस-यूरोप गठबंधन अमेरिका से आगे निकल जाता है। रूस, ब्रिटेन और फ्रांस को मिलाकर इस गठबंधन के पास 6,250 परमाणु वॉरहेड्स हैं जबकि अमेरिका के पास 5,044 हैं। यह वह स्थिति है जहां युद्ध का परिणाम केवल विनाश होता है जीत-हार का महत्व खत्म हो जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा गठबंधन फिलहाल केवल एक काल्पनिक स्थिति है क्योंकि अभी केवल बयानबाजी का दौर चल रहा है।