‘कुर्द भाड़े के हत्यारे नहीं…’, इराक की फर्स्ट लेडी ने लगाई गुहार, बोली- हमें अपनी लड़ाई से दूर रखो
US-Iran War: इराक की फर्स्ट लेडी शनाज इब्राहिम अहमद ने अमेरिका, इजरायल और ईरान से अपील की कि कुर्दों को अपनी लड़ाइयों में मोहरा न बनाएं, उनका सम्मान जरूरी है।
- Written By: अक्षय साहू
इराक की प्रथम महिला शनाज इब्राहिम अहमद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iraq First Lady Kurds Statement: इराक की प्रथम महिला शनाज इब्राहिम अहमद ने अमेरिका, इजरायल और ईरान सहित सभी अंतरराष्ट्रीय ताकतों से अपील की है कि वे कुर्द समुदाय को अपने भू-राजनीतिक संघर्षों में न घसीटें। उनके कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि कुर्दों के पास इतिहास से मिले ऐसे अनुभव हैं जिन्हें वे कभी भूल नहीं सकते।
बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि दुनिया की बड़ी शक्तियां अक्सर कुर्दों को तभी याद करती हैं जब उन्हें उनकी ताकत, साहस या बलिदान की जरूरत होती है। इसी वजह से उन्होंने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आग्रह किया कि कुर्दों को शांति से रहने दिया जाए, क्योंकि वे किसी के लिए किराए पर लड़ने वाले सैनिक या हथियार नहीं हैं।
कुर्दों को कई बार अकेला छोड़ा गया
शनाज इब्राहिम ने अतीत की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि कठिन समय में कुर्दों को कई बार अकेला छोड़ दिया गया। उदाहरण के तौर पर 1991 का दौर याद दिलाया गया, जब कुर्दों से सद्दाम हुसैन की सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के लिए कहा गया था।
सम्बंधित ख़बरें
14 निकले, 14 बाकी! होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों पर विदेश मंत्रालय का बड़ा अपडेट, जानें क्या है स्थिति
हिंद महासागर में अमेरिकी सेना का बड़ा एक्शन: ईरान का तेल टैंकर मैजेस्टिक X जब्त, श्रीलंका के पास हुई कार्रवाई
नशा मुक्त होगा जम्मू-कश्मीर! ड्रग तस्करों के घरों पर चला बुलडोजर, कई अवैध ढांचे किए ध्वस्त, देखें VIDEO
सत्ता और सुहाग दोनों दांव पर: ट्रंप के खिलाफ पार्टी के भीतर विद्रोह, क्या मेलानिया भी अब छोड़ेंगी साथ?
उस समय उम्मीद जगाई गई थी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनका साथ देगा। लेकिन हालात बदलते ही कुर्दों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। जब शासन ने विद्रोह को कुचलने के लिए हेलीकॉप्टर गनशिप और टैंकों का इस्तेमाल किया, तब उनकी रक्षा के लिए कोई आगे नहीं आया। इस घटना ने कुर्द समाज की सामूहिक स्मृति में गहरा असर छोड़ा।
इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका
कुर्द समुदाय आज भी उस ऐतिहासिक विद्रोह को 1991 कुर्द विद्रोह या ‘रापारिन’ के नाम से याद करता है। उस समय के अनुभवों ने उन्हें यह सिखाया कि बाहरी वादों पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। बयान में हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए उत्तरी-पूर्वी सीरिया के उस क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया जिसे रोजावा कहा जाता है। वहां कुर्द बलों ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर रहकर बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल सकी।
यह भी पढ़ें: ‘नहीं करेंगे सीजफायर…’, अमेरिका के जमीनी कार्रवाई के फैसले पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री, ट्रंप को दे दी धमकी
प्रथम महिला ने कहा कि आज इराक के कुर्दों ने लंबे संघर्ष के बाद अपेक्षाकृत स्थिर और सम्मानजनक जीवन हासिल किया है। ऐसे में उनके लिए यह स्वीकार करना बेहद कठिन है कि वे फिर से वैश्विक शक्तियों की रणनीतियों में मोहरे की तरह इस्तेमाल हों। उनका स्पष्ट संदेश है कि कुर्द लोग दूसरों की लड़ाइयों में शामिल नहीं होना चाहते और उन्हें अपने भविष्य का फैसला खुद करने दिया जाना चाहिए।
