ईरान वॉर जोन में फंसे 23,000 भारतीय नाविक (सोर्स-सोशल मीडिया)
Indian Seafarers In Iran War: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने हजारों भारतीय परिवारों की नींद उड़ा दी है। समुद्र में काम करने वाले करीब 23,000 भारतीय नाविकों की जान इस समय गहरे खतरे में है क्योंकि युद्ध का दायरा अब व्यापारिक रास्तों तक फैल चुका है। पिछले एक हफ्ते में हुए कई हमलों और तीन भारतीय साथियों की मौत ने नाविक संगठनों को सरकार से मदद मांगने पर मजबूर कर दिया है। नाविक यूनियनों ने मुंबई में जहाजरानी महानिदेशालय से मिलकर तुरंत ठोस कदम उठाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भारतीय क्रू वाले जहाजों पर कम से कम नौ हमले हो चुके हैं। इन हमलों ने होर्मुज स्ट्रैट, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी जैसे व्यापारिक मार्गों को बेहद डरावना और असुरक्षित बना दिया है। नाविकों के लिए इन इलाकों से गुजरना अब अपनी जान हथेली पर रखकर चलने जैसा हो गया है जो उनके परिवारों के लिए बेहद चिंताजनक है।
सबसे हालिया हमला 5 मार्च को हुआ जब बहामास के झंडे तले चल रहे जहाज ‘सोनांगोल नामीबे’ पर इराक के पास भीषण गोलीबारी की गई। इस जहाज पर दस भारतीय नाविक मौजूद थे और धमाके से पूरा डेक दहल गया था लेकिन अच्छी बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई। हालांकि जहाज की दिशा तय करने वाली प्रणाली सुरक्षित रही लेकिन इस घटना ने समुद्र में काम कर रहे भारतीयों के मन में गहरा डर भर दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने अब पूरे समुद्री इलाके को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित कर दिया है जहां वर्तमान में 36 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रैट के पश्चिमी हिस्से में और 12 जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं जो किसी भी समय हमले का शिकार हो सकते हैं। अदन की खाड़ी में भी तीन भारतीय जहाज मौजूद हैं जिनके नाविक अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
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नाविक संगठनों ने मांग की है कि युद्ध क्षेत्र में फंसे इन भारतीयों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय को तुरंत मिलकर काम करना चाहिए। फॉर्वर्ड सीमेन यूनियन ने मांग की है कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में नाविक के परिवार को कम से कम 45 लाख रुपये का मुआवजा मिले। यूनियन का कहना है कि सरकार को इन जांबाज नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए अब और अधिक देरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि हालात बिगड़ रहे हैं।