US-Iran युद्ध से अमेरिका में हथियारों का सूखा, यूरोपीय देशों को डिलीवरी में हो रही भारी देरी
Weapon Supply Chain: US-Iran युद्ध से वैश्विक हथियार आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिका में हथियारों की भारी कमी हो गई है, जिससे यूरोपीय देशों को रक्षा डिलीवरी में काफी देरी हो रही है।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिका और ईरान युद्ध (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Iran War Impact: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर युद्ध ने अब पूरी दुनिया की सुरक्षा स्थिति को चिंता में डाल दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अमेरिका के पास अपने ही सहयोगियों को देने के लिए हथियारों की कमी पड़ गई है। इस US-Iran युद्ध का प्रभाव के कारण अमेरिकी रक्षा भंडार बहुत ही तेजी से खाली हो रहे हैं। इसका सीधा असर उन यूरोपीय देशों पर पड़ रहा है जो अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिकी हथियारों के भरोसे बैठे थे।
हथियारों की डिलीवरी में देरी
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय देशों को इस परेशानी के बारे में सूचित किया है। उन्होंने बताया है कि पहले से तय और कॉन्ट्रैक्ट हो चुके हथियारों की डिलीवरी में अब लंबा इंतजार करना होगा। US-Iran युद्ध में भारी खपत के कारण 28 फरवरी के बाद से अमेरिकी हथियारों का स्टॉक लगातार सूख रहा है।
बाल्टिक देशों पर सीधा असर
इस अमेरिकी फैसले की सबसे ज्यादा मार रूस की सीमा के करीब बसे बाल्टिक और स्कैंडिनेवियाई देशों पर पड़ेगी। एस्टोनिया और लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालयों ने भी पुष्टि की है कि उन्हें डिलीवरी में देरी के आधिकारिक संदेश मिल चुके हैं। ये देश अपनी रक्षा तैयारियों के लिए पूरी तरह से अमेरिकी ‘फॉरेन मिलिट्री सेल्स’ प्रोग्राम पर ही निर्भर करते हैं।
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पेंटागन का गोल-मोल जवाब
जब डिलीवरी में इस भारी देरी पर विदेश विभाग से सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले को सीधे पेंटागन पर टाल दिया। पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सेना ताकतवर है और वह अपने सहयोगियों की जरूरतों का पूरा ख्याल रखेगी। हालांकि उन्होंने ‘ऑपरेशनल सिक्योरिटी’ का हवाला देते हुए यह बताने से साफ इनकार कर दिया कि किन हथियारों को रोका गया है।
‘मेड इन यूरोप’ की नई मांग
हथियार न मिलने से यूरोपीय देश बेहद नाराज हैं क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने उन पर अमेरिकी हथियार खरीदने का बहुत दबाव बनाया था। अरबों डॉलर के बड़े सौदे करने के बाद भी US-Iran युद्ध के समय अमेरिका द्वारा हाथ पीछे खींच लेने से यूरोप की चिंताएं बढ़ गई हैं। यही कारण है कि अब यूरोपीय देश अमेरिकी हथियारों के बजाय ‘मेड इन यूरोप’ डिफेंस सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिका का यूरोप पर आरोप
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारी हथियारों की इस देरी के लिए खुद यूरोपीय देशों को भी पूरी तरह जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका तर्क है कि ईरान युद्ध में और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने में यूरोप ने अमेरिका की पर्याप्त मदद बिल्कुल नहीं की। अमेरिका को मध्य-पूर्व में अपनी मोर्चेबंदी मजबूत करने के लिए फिलहाल इन सभी हथियारों की बहुत ही ज्यादा और तत्काल जरूरत है।
