युद्ध के बीच US का फैसला: हथियारों की कमी दूर करने के लिए जीएम और फोर्ड बनाएंगी सैन्य उपकरण

Pentagon Defense Contracts: यूक्रेन और ईरान युद्ध के कारण US में हथियारों का स्टॉक कम हो गया है। इसे देखते हुए पेंटागन अब जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी बड़ी कार कंपनियों को हथियार बनाने का ठेका देगा।
US Pentagon To Give Weapons Production Contracts To Automakers GM And Ford Amid War Shortage
हथियार उत्पादन ठेका (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Military Weapons Stock Shortage: दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्धों के कारण अमेरिका के सामने हथियारों की भारी कमी का संकट पैदा हो गया है। ईरान और यूक्रेन के साथ चल रहे लंबे संघर्षों ने पेंटागन की सैन्य आपूर्ति और रक्षा भंडार को बहुत कम कर दिया है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अब दूसरे विश्व युद्ध जैसी रणनीति अपना रहा है। अमेरिकी सरकार अब अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी कार निर्माता कंपनियों से हथियार बनवाने पर विचार कर रही है।

ऑटो कंपनियों से बातचीत

रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनरल मोटर्स और फोर्ड मोटर जैसी दिग्गज कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया है। जनरल मोटर्स की प्रमुख मैरी बारा और फोर्ड के जिम फार्ले के साथ हथियारों के उत्पादन को लेकर बातचीत चल रही है। ये दोनों बड़ी मोटर्स कंपनियां पहले से ही लंबे समय से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को विशेष वाहन मुहैया कराती आ रही हैं।

हथियारों का कम होता स्टॉक

यूक्रेन और ईरान में लगातार चल रहे युद्धों के कारण US में हथियारों और गोला-बारूद का स्टॉक काफी कम हो गया है। पेंटागन इन कार निर्माता कंपनियों के कुशल कर्मचारियों और उनकी विशाल फैक्ट्री क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि यह बातचीत अभी शुरुआती दौर में है लेकिन रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इसे बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

पारंपरिक कंपनियों पर दबाव

ईरान के साथ मौजूदा जंग के बाद US की पारंपरिक रक्षा कंपनियों पर हथियार बनाने का भारी बोझ आ गया है। अगर भविष्य में यह जंग और अधिक बढ़ती है तो ये पारंपरिक रक्षा कंपनियां हथियारों की इस मांग को पूरा नहीं कर पाएंगी। इसी कारण रक्षा अधिकारियों ने पारंपरिक कंपनियों को सहारा देने के लिए अमेरिकी निर्माताओं से तत्काल मदद की गुहार लगाई है।

अन्य कंपनियों की भागीदारी

रक्षा अधिकारियों के साथ चल रही इस अहम बातचीत में केवल कार बनाने वाली कंपनियां ही नहीं बल्कि अन्य कंपनियां भी शामिल हैं। इन बड़ी कंपनियों में जीई एयरोस्पेस और भारी गाड़ियां तथा मशीनरी बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी ओशकोश का नाम भी शामिल है। US सरकार चाहती है कि ये सभी व्यावसायिक कंपनियां रक्षा उपकरणों के उत्पादन में तेजी से लगकर देश की सुरक्षा को मजबूत करें।

रक्षा सचिव का बयान

पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि वे उपलब्ध व्यावसायिक तकनीक का उपयोग करके रक्षा औद्योगिक आधार को तेजी से बढ़ाएंगे। इससे यह पक्का हो सकेगा कि युद्ध के मैदान में अमेरिकी लड़ाकों के पास हथियारों की कोई कमी न रहे और वे बढ़त बनाए रखें। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस सैन्य उत्पादन की पहल को युद्ध स्तर के बराबर लाने की सबसे नई रणनीति करार दिया है।

विश्व युद्ध जैसी रणनीति

US की यह नई योजना लोगों को सीधे तौर पर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपनाई गई पुरानी रणनीतियों की याद दिलाती है। उस समय भी अमेरिकी सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए कई नागरिक कारखानों को हथियार बनाने वाले कारखानों में बदल दिया था। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि आज की गंभीर परिस्थितियों में भी उसी तरह की आक्रामक और तेज उत्पादन नीति अपनाई जाए।

सैन्य उपकरणों का निर्माण

इन बड़ी ऑटोमेकर कंपनियों को अब युद्ध के मैदान के लिए कई अन्य तरह के जरूरी सैन्य उपकरण बनाने का अहम काम मिलेगा। कार निर्माता कंपनियों के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की आधुनिक तकनीक होती है जो सेना के बहुत काम आ सकती है। इससे US सेना को कम समय में ज्यादा और अच्छे उपकरण मिल सकेंगे जिससे उनकी युद्ध क्षमता में भारी इजाफा होगा।

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व्यावसायिक समाधान का उपयोग

रक्षा विभाग अब अपनी सभी जरूरतों के लिए केवल पुराने रक्षा ठेकेदारों पर ही पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना चाहता है। पेंटागन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे सभी व्यावसायिक समाधानों और कमर्शियल तकनीकों का युद्ध में इस्तेमाल करेंगे। इससे देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव आएगा और सेना के हथियारों की आपूर्ति की समस्या भी खत्म हो जाएगी।

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