मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य फेरबदल! 48 घंटे में ईरान से दूर हुए 3 अमेरिकी जंगी जहाज, जंग से पीछे हट रहा है US ?
US Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने अपने तीन प्रमुख जंगी जहाजों, जिनमें विमानवाहक पोत जेराल्ड फोर्ड भी शामिल है, को मिडिल ईस्ट से हटा लिया है। जानें इसके पीछे की बड़ी वजह।
- Written By: अमन उपाध्याय
अमेरिकी जंगी जहाज, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Military Ships Leaving Middle East: ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे और तनावपूर्ण युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले 48 घंटों में अमेरिका ने मिडिल ईस्ट से अपने तीन महत्वपूर्ण जंगी जहाजों को हटा लिया है। इन जहाजों को ऐसे समय पर हटाया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लगातार लंबा खिंचता जा रहा है। हालांकि अमेरिका ने इन जहाजों को हटाने का कोई एक साझा आधिकारिक कारण नहीं बताया है लेकिन अलग-अलग जहाजों के लिए अलग-अलग तर्क दिए गए हैं।
USS जेराल्ड फोर्ड और माइंस जहाजों की वापसी
रिपोर्टों के अनुसार, जिन तीन जहाजों को हटाया गया है उनमें सबसे प्रमुख विमानवाहक युद्धपोत जेराल्ड फोर्ड है। इसे जनवरी 2026 में ईरान की घेराबंदी के लिए ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया था लेकिन अब इसे क्रेते स्थित अमेरिकी नौसेना के अड्डे की ओर ले जाया जा रहा है। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ्ते इस युद्धपोत में आग लग गई थी जिससे यह काफी क्षतिग्रस्त हो गया है और इसे मरम्मत के लिए हटाया गया है।
इसके अलावा, पानी के नीचे बारूदी सुरंगों को हटाने वाले दो अन्य जहाज, यूएसएस तुलसा और यूएसएस सांता को भी मध्य पूर्व से हटाकर मलेशिया की ओर भेज दिया गया है। वर्तमान में ये जहाज होर्मुज से लगभग 3500 किलोमीटर दूर हैं। इस श्रेणी का अब केवल एक ही जहाज मिडिल ईस्ट में तैनात बचा है।
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जंग में फंस गया है ट्रंप प्रशासन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बाल्टन ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान युद्ध में बुरी तरह फंस चुका है। बाल्टन के अनुसार, अमेरिका इस युद्ध को तुरंत खत्म करना चाहता था लेकिन ईरान ने उसे उलझा दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका बिना किसी ठोस समझौते के युद्ध खत्म करता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
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वहीं, ओमान के विदेश मंत्री अलबुसैदी ने भी अमेरिका से तुरंत युद्ध रोकने की अपील करते हुए कहा है कि इस जंग में किसी की जीत नहीं होने वाली और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान ने चुप्पी साध रखी है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि ओमान में इन युद्धपोतों की जगह किन नए जहाजों को तैनात किया जाएगा या ये कब तक वापस लौटेंगे।
