अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप के टैरिफ पर रोक से भारतीय निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

Supreme Court Verdict: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पारस्परिक टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाकर भारत के लिए 18 प्रतिशत शुल्क की अनिश्चितता खत्म कर दी है, जिससे निर्यातकों को बड़ी राहत और कानूनी सुरक्षा मिली है।
US Supreme Court Ruling: Uncertainty Over 18% Tariffs for India Ends Providing Major Relief
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला टैरिफ पर रोक से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US International Trade Law: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पारस्परिक टैरिफ के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिससे वैश्विक व्यापार में स्थिरता आने की उम्मीद है। यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कोर्ट ने एकतरफा टैरिफ को अवैध करार दिया है। इस फैसले से भारत के लिए टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हो गई है और व्यापारिक संबंध सुधरने की संभावना है। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के तहत अब राष्ट्रपति को ऐसे व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य रूप से लेनी होगी।

भारत के लिए बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारत के लिए 18 प्रतिशत टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय ने राष्ट्रपति की एकतरफा टैरिफ लगाने की शक्तियों पर स्पष्ट कानूनी सीमा तय कर दी है। अब भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार व्यवस्था के तहत तय किया गया 18 प्रतिशत का टैरिफ पूरी तरह अप्रासंगिक हो गया है।

निर्यातकों को मिलेगा फायदा

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर मनोज मिश्रा के अनुसार अब टैरिफ लगाने का कोई भी प्रयास कांग्रेस की मंजूरी के बिना संभव नहीं होगा। इससे भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी राहत और एक बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की प्रबल संभावना नजर आती है। साथ ही पूर्व में बिना पर्याप्त कानूनी आधार के वसूले गए टैरिफ की वापसी का रास्ता भी अब पूरी तरह से खुल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

अदालत ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के व्यापक टैरिफ प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पास ऐसी असाधारण शक्तियां नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए स्पष्ट किया कि 1977 के आपातकालीन कानून के तहत राष्ट्रपति को अधिकार नहीं है। असीमित राशि और अवधि में एकतरफा शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रपति को अब हर हाल में अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति लेनी होगी।

कानूनी सीमाओं का निर्धारण

मुख्य न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने असीमित दायरे में टैरिफ लगाने की जिस शक्ति का दावा किया था वह पूरी तरह अनुचित है। 1977 का वह कानून जिसका हवाला देकर ये शुल्क लगाए गए थे वह वास्तव में कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। यह फैसला स्पष्ट करता है कि व्यापारिक नीतियों में राष्ट्रपति की शक्तियां कानून के दायरे से बाहर बिल्कुल भी नहीं हो सकतीं।

भविष्य की व्यापारिक चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से न केवल भारत बल्कि अन्य व्यापारिक साझेदार देशों को भी बड़ी राहत और वैश्विक स्थिरता मिलेगी। हालांकि अमेरिका भविष्य में रणनीतिक क्षेत्रों में सेक्शन 232 के तहत कुछ विशेष क्षेत्रों पर टैरिफ लगाने का सहारा अभी भी ले सकता है। ऐसे में भारत के लिए भविष्य में बाजार तक सुनिश्चित पहुंच के लिए अमेरिका के साथ एक मजबूत द्विपक्षीय व्यापार समझौता करना जरूरी है।

स्थिरता की ओर कदम

दीर्घकालिक टैरिफ स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों को मिलकर व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में तेजी से काम करने की आवश्यकता है। यह अदालती निर्णय भारतीय बाजार के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और व्यापारिक अनिश्चितताओं को काफी हद तक कम कर देगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका की मनमानी नीतियों पर लगी यह लगाम अंतरराष्ट्रीय व्यापार के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

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