दक्षिण कोरिया और अमेरिका का सैन्य अभ्यास, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US South Korea Military Drill: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक और मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। सोमवार, 9 मार्च 2026 से शुरू हुआ यह अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड 26’ के नाम से जाना जा रहा है, जो 19 मार्च तक जारी रहेगा।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, इस विशाल अभ्यास में लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने सुरक्षा कारणों से अपने शामिल होने वाले सैनिकों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है लेकिन यह स्पष्ट है कि यह अभ्यास उनकी संयुक्त रक्षा क्षमता को परखने का एक बड़ा मंच है। इस वार्षिक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर डोमेन में किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी करना है।
इस अभ्यास के दौरान ‘वारियर शील्ड’ नाम की एक विशेष फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज भी आयोजित की जा रही है। इसके तहत बड़े पैमाने पर 22 लाइव ट्रेनिंग ड्रिल्स होंगी, जिनमें एयर असॉल्ट (हवाई हमला), वेट गैप क्रॉसिंग और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसे जटिल और चुनौतीपूर्ण सैन्य ऑपरेशन शामिल हैं।
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ सक्रिय रूप से सैन्य कार्रवाई में व्यस्त है। दक्षिण कोरियाई मीडिया में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका ने अपनी रक्षा रणनीति के तहत दक्षिण कोरिया से कुछ महत्वपूर्ण संसाधन, जैसे पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, हटाकर मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिए हैं।
हालांकि, यूएस फोर्सेज कोरिया (USFK) ने सुरक्षा कारणों से इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
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इस अभ्यास से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। उत्तर कोरिया (प्योंगयांग) हमेशा से अमेरिका-दक्षिण कोरिया के इन अभ्यासों को ‘आक्रमण का पूर्वाभ्यास’ मानता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया इस सैन्य प्रदर्शन का जवाब बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च या अन्य उकसावे वाली गतिविधियों के जरिए दे सकता है, जैसा कि उसने पिछले वर्षों में भी किया है। हालांकि, सहयोगियों ने इस ड्रिल को पूरी तरह रक्षात्मक बताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक करार दिया है।