अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह सय्यद अली होसैनी ख़ामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Reward for Justice IRGC information: अमेरिकी सरकार ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को कमजोर करने के लिए एक अभूतपूर्व कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाया है। “रिवॉर्ड फॉर जस्टिस” कार्यक्रम के तहत वाशिंगटन ने ईरानी नागरिकों से IRGC के आर्थिक नेटवर्क और गुप्त गतिविधियों की सटीक जानकारी साझा करने की अपील की है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरानी शासन जनता की गाढ़ी कमाई के अरबों डॉलर अपनी सैन्य शक्ति और दमनकारी नीतियों पर खर्च कर रहा है। यह पहल उस समय शुरू की गई है जब ईरान के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय दबाव अपने चरम पर हैं।
अमेरिकी सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि जो नागरिक IRGC के वित्तीय स्रोतों और उनकी अस्थिर गतिविधियों की गुप्त जानकारी देंगे, उन्हें बड़ा आर्थिक इनाम दिया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य IRGC की उन आर्थिक नसों को काटना है जिनका उपयोग हिंसा फैलाने और सत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है। अमेरिका इसे आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने की अपनी पुरानी और सफल रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहा है।
सूचना देने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रिलोकेट करने यानी दूसरी जगह बसाने का भी वादा किया है। वाशिंगटन का मानना है कि IRGC अपनी जनता की संपत्ति का दुरुपयोग कर उन्हें ही दबाने का काम कर रही है, जिसे अब रोकना अनिवार्य है। इस कदम से ईरान के भीतर मुखबिरों का एक जाल तैयार होने की संभावना है जो शासन की जड़ों को हिला सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार IRGC को ईरान की सत्ता संरचना का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है और इस पर सीधा प्रहार करना तनाव को और गहरा कर सकता है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि IRGC की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि उनके वैश्विक प्रभाव को सीमित किया जा सके। यह कार्रवाई ईरानी शासन के भीतर फूट डालने और उनकी सैन्य शक्ति को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
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यह घोषणा ऐसे संवेदनशील समय में हुई है जब ईरान की सड़कों पर नागरिक खामेनेई शासन के खिलाफ लगातार विद्रोह कर रहे हैं और विदेशी प्रतिबंध कड़े होते जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप भले ही सीधे सैन्य हमले को टालने के संकेत दे रहे हों, लेकिन इस तरह के मनोवैज्ञानिक युद्ध ने तेहरान की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। अमेरिका की इस नई रणनीति से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और राजनयिक संबंधों पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।