ईरान विरोध पर Gazelle Sharmahd का बड़ा बयान: इसे सत्ता परिवर्तन नहीं, देश की आजादी की जंग समझें
Iran Protest Update: गजेल शर्माहद ने ईरान प्रदर्शनों को सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि आजादी की जंग बताया है। उन्होंने शासन पर नरसंहार का आरोप लगाते हुए इसकी तुलना नाजी कब्जे से फ्रांस की मुक्ति से की है।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरानी मूल की कार्यकर्ता गजेल शर्माहद (सोर्स-सोशल मीडिया)
Gazelle Sharmahd on Iran liberation war: ईरानी मूल की प्रमुख कार्यकर्ता गजेल शर्माहद ने ईरान में जारी अशांति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक कड़ा संदेश दिया है। उनके अनुसार, वर्तमान विरोध प्रदर्शन केवल सरकार बदलने की कोशिश नहीं हैं, बल्कि यह एक राष्ट्र को दमनकारी शासन से मुक्त कराने का निर्णायक संघर्ष है।
गजेल ने इस आंदोलन की तुलना नाजी कब्जे से फ्रांस की मुक्ति से करते हुए इसे आजादी की लड़ाई करार दिया है। उनके पिता जमशेद शर्माहद को ईरान सरकार द्वारा फांसी दिए जाने के बाद, वह अब वैश्विक मंच पर ईरानी नागरिकों के अधिकारों की मुखर आवाज बन गई हैं।
आजादी बनाम सत्ता परिवर्तन
गजेल शर्माहद का मानना है कि दुनिया ईरान की स्थिति को समझने में बड़ी भूल कर रही है जिसे वह खतरनाक मानती हैं। उनके अनुसार, यह विद्रोह किसी सामान्य राजनीतिक सुधार के लिए नहीं बल्कि एक हिंसक और ‘विदेशी कब्जे’ जैसे शासन से पूर्ण मुक्ति पाने के लिए है। वह स्पष्ट करती हैं कि 1979 की घटनाएं कोई वास्तविक क्रांति नहीं बल्कि एक राष्ट्र विरोधी तख्तापलट था जिसने देश को अंधेरे में धकेल दिया।
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ऐतिहासिक तुलना और संघर्ष
शर्माहद ने ईरान के वर्तमान हालातों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों के अधीन रहे फ्रांस से की है। उनका तर्क है कि जिस तरह फ्रांस ने विदेशी नियंत्रण से आजादी पाई थी, उसी तरह ईरानी जनता भी अपनी अस्मिता बचाने के लिए लड़ रही है। शासन द्वारा हाल ही में फांसी की सजाओं पर रोक लगाने के दावों को उन्होंने पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करने की एक चाल बताया है।
नरसंहार और जवाबदेही
उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों और IRGC पर हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों को गोली मारने का गंभीर आरोप लगाते हुए इसे खुला नरसंहार करार दिया है। गजेल का कहना है कि पिछले 47 वर्षों से शासन ने नागरिकों को पीटना और उनकी हत्या करना कभी बंद नहीं किया है। वह इन अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा चलाने और शासन के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग पुरजोर तरीके से कर रही हैं।
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पतन का अंतिम चरण
शर्माहद के मुताबिक ईरान का वर्तमान शासन अब अपने पतन के सबसे अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उनका कहना है कि अब सवाल यह नहीं है कि शासन गिरेगा या नहीं, बल्कि यह है कि इसके हटने के दौरान और कितना रक्तपात होगा। वह चाहती हैं कि विश्व शक्तियां इस आंदोलन को गंभीरता से लें और ईरानी नागरिकों को इस खूनी संघर्ष से बचाने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करें।
