
अमेरिका के वेनेजुएला आक्रमण पर वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया (सोर्स-सोशल मीडिया)
International Response to US Venezuela War: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की राजधानी कराकस पर किए गए अचानक सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस ऑपरेशन के बाद वैश्विक शक्तियां दो स्पष्ट धड़ों में बंट गई हैं, जहां एक पक्ष इसे तानाशाही के अंत के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन मान रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि मादुरो को न्यूयॉर्क में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस सैन्य हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और वैश्विक तेल कूटनीति पर एक नई और तीखी बहस छेड़ दी है, जिसके परिणाम आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक संबंधों को प्रभावित करेंगे।
रूस ने इस सैन्य कार्रवाई की तीव्र निंदा करते हुए इसे एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ अवैध कदम बताया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की अपील की है। रूस का तर्क है कि दो देशों के बीच किसी भी विवाद का समाधान केवल आपसी संवाद और कूटनीति से होना चाहिए, न कि हथियारों के बल पर।
चीन ने भी अमेरिकी हवाई हमलों को ‘दादागिरी’ करार देते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वे किसी भी देश द्वारा दूसरे राष्ट्र की संप्रभुता और उसके निर्वाचित नेतृत्व के खिलाफ बल प्रयोग के सख्त खिलाफ हैं। चीन के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश करती है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेनेजुएला के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का समर्थन किया, लेकिन बाहरी सैन्य कार्रवाई को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इटली ने कभी मादुरो की जीत को मान्यता नहीं दी थी, फिर भी किसी शासन को बदलने के लिए युद्ध हमेशा सही रास्ता नहीं होता।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मादुरो की गिरफ्तारी को तानाशाही से मुक्ति बताया और वेनेजुएला के लोगों की खुशी का समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि निर्वाचित राष्ट्रपति एडमूंडो गोंजालेज उरुतिया जल्द ही शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता संभालेंगे। वहीं, ब्रिटेन ने साफ किया कि वह इस हमले में शामिल नहीं था, लेकिन मादुरो के शासन के अंत पर उन्हें कोई अफसोस नहीं है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने इस हमले को ‘अस्वीकार्य सीमा’ बताया और इसे वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला करार दिया। ब्राजील ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपात कैबिनेट बैठक बुलाई और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने भी मादुरो की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका वेनेजुएला के प्रशासन को अपने नियंत्रण में लेता है, तो मेक्सिको अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेगा। दूसरी ओर, अर्जेंटीना जैसे देशों ने ट्रंप के इस कदम को ‘आजादी की जीत’ बताते हुए खुलकर समर्थन किया है।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला का संचालन करेगा जब तक सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता। उन्होंने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का उपयोग करने और उसे अन्य देशों को बेचने की योजना का भी खुलासा किया। इस बयान ने उन आलोचकों को बल दिया है जो मानते हैं कि यह हमला तेल संसाधनों पर कब्जे के लिए किया गया है।
अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाई पर विरोध के स्वर उठे हैं। सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इसे ‘खुला साम्राज्यवाद’ बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति को एकतरफा युद्ध छेड़ने का अधिकार नहीं है। न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए चिंता जताई कि इसका असर वहां रहने वाले प्रवासियों पर पड़ेगा।
इस घटना ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और किसी देश की आंतरिक राजनीति में सैन्य हस्तक्षेप के नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। भविष्य में अन्य देश भी संसाधनों या विचारधारा के नाम पर ऐसी ही कार्रवाइयों को जायज ठहरा सकते हैं।
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर भी इस उथल-पुथल का असर दिखने की संभावना है। चूंकि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, इसलिए वहां का प्रशासन अमेरिका के हाथ में जाने से वैश्विक ऊर्जा समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। पूरी दुनिया अब यह देख रही है कि आने वाले दिनों में वेनेजुएला में शांति बहाल होती है या यह क्षेत्र एक लंबे संघर्ष की चपेट में आ जाता है।






