अमेरिका की तेल कूटनीति (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Military Oil Strategy: दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका अक्सर हज़ारों मील दूर दूसरे देशों में अपनी सेना क्यों भेजता है। क्या यह वाकई लोकतंत्र को बचाने की जंग है या फिर सारा मसला उस कीमती तेल भंडार पर कब्जे का है। इतिहास गवाह है कि जिन देशों के पास तेल के बड़े भंडार थे, वहां अमेरिका की मौजूदगी अक्सर देखी गई। हाल ही में ईरान और वेनेजुएला में हुई घटनाओं ने इस पुराने ‘ऑयल पैटर्न’ को एक बार फिर हवा दे दी है।
साल 1991 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म’ शुरू किया था ताकि कुवैत को इराक के कब्जे से पूरी तरह छुड़ाया जा सके। भले ही दुनिया को इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा बताया गया, लेकिन असल मकसद तेल सप्लाई लाइन पर कड़ा नियंत्रण करना था। सऊदी अरब और कुवैत के तेल भंडार को सुरक्षित करना अमेरिका की रणनीति का एक बहुत ही निर्णायक और महत्वपूर्ण हिस्सा था।
इसके बाद 2003 में इराक पर हमला कर सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाया गया और साल 2006 में उन्हें फांसी दे दी गई। इसी तरह 2011 में लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी को निशाना बनाया गया, जिसके पास पूरे अफ्रीका महाद्वीप का सबसे बड़ा तेल भंडार है। गद्दाफी के पतन के बाद लीबिया गृहयुद्ध में जल उठा, लेकिन वहां के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की रेस आज भी जारी है।
साल 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर वहां से सीधे अमेरिका भेज दिया। वेनेजुएला के पास 300 बिलियन बैरल से भी ज्यादा का दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार मौजूद है जो उसे बहुत खास बनाता है। अमेरिका ने इसे ड्रग्स के खिलाफ जंग कहा, लेकिन जानकार इसे विशाल तेल भंडार पर अपनी धाक जमाने की एक और कोशिश मानते हैं।
1 मार्च 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु की खबर ने इस समय पूरी दुनिया के देशों को हिला कर रख दिया है। ईरान के पास 209 अरब बैरल तेल है, जिसकी क्वालिटी बेहतरीन है लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यह भंडार सालों से फंसा था। परमाणु मुद्दों के पीछे छिपी यह तेल की पुरानी राजनीति अब एक नई और बहुत ही खतरनाक वैश्विक सैन्य कार्रवाई में बदल चुकी है।
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ईरान, इराक, लीबिया और वेनेजुएला जैसे देशों में हो रही इन तमाम घटनाओं में सिर्फ एक ही चीज समान है और वह है ‘तेल’। क्या यह सिर्फ ‘आतंकवाद’ के खिलाफ लड़ाई है या फिर अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाने वाले इस बेशकीमती काले सोने पर अधिकार की जंग है। आने वाले समय में अमेरिका की यह ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ पूरी दुनिया का राजनीतिक और आर्थिक नक्शा पूरी तरह से बदल कर रख सकती है।