ईरान पर ट्रंप के दो बड़े विकल्प: ‘टोकन’ परमाणु समझौता या खामेनेई पर सीधा सैन्य हमला
Trump Iran Strategy: ट्रंप प्रशासन ईरान को सीमित परमाणु संवर्धन की अनुमति देने या खामेनेई को निशाना बनाने पर विचार कर रहा है। तनाव के बीच अमेरिका 10 दिन का अल्टीमेटम भी दे चुका है।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Iran Nuclear Military Options: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच अरब सागर में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है जिसके कारण युद्ध की आशंका काफी बढ़ गई है। अधिकारियों की तरफ से ट्रंप के सामने इस संकट को सुलझाने के लिए मुख्य रूप से दो बड़े विकल्प पेश किए गए हैं। पहले विकल्प में ईरान को बेहद सीमित परमाणु संवर्धन की अनुमति देना शामिल है ताकि परमाणु बम की कोई गुंजाइश न बचे। वहीं दूसरे विकल्प के तौर पर सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके परिवार पर सैन्य हमला करने का प्रस्ताव है।
परमाणु समझौते की नई पहल
अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब एक ऐसा समझौता चाहते हैं जिसे राजनीतिक रूप से सफलता के रूप में बेचा जा सके। इस नए प्रस्ताव के तहत ईरान को केवल ‘टोकन’ या सांकेतिक स्तर पर ही यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए शर्त यह होगी कि ईरान तकनीकी रूप से भरोसेमंद गारंटी दे जिससे भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की कोई भी संभावना पूरी तरह खत्म हो जाए।
पेंटागन के सैन्य विकल्प
दूसरी ओर पेंटागन ने राष्ट्रपति के सामने कई घातक सैन्य विकल्प भी रखे हैं जिनमें रणनीतिक ठिकानों के साथ-साथ नेतृत्व को खत्म करना शामिल है। इनमें एक सबसे चरम सैन्य विकल्प ऐसा भी बताया जा रहा है जिसमें सीधे सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप के एक वरिष्ठ सलाहकार ने स्पष्ट किया कि हालांकि अभी हमला करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन राष्ट्रपति कभी भी आदेश दे सकते हैं।
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ईरान का पक्ष और प्रस्ताव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा है कि उनका देश जल्द ही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपना एक विस्तृत और ठोस प्रस्ताव पेश करेगा। उनका दावा है कि जिनेवा में हुई पिछली बैठक के दौरान अमेरिका ने ‘जीरो एनरिचमेंट’ या शून्य संवर्धन की कोई भी औपचारिक मांग ईरान के सामने नहीं रखी थी। ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे और उसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से भी जल्द राहत मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रौसी भी इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा उपायों पर चर्चा के लिए सक्रिय रूप से शामिल हैं। संभावित सुरक्षा उपायों में अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की वापसी, सख्त मॉनिटरिंग और उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह निष्क्रिय करना शामिल हो सकता है। खाड़ी के देशों जैसे ओमान और कतर का भी मानना है कि कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जिसे दोनों पक्ष अपनी जीत बता सकें।
अल्टीमेटम और युद्ध की आशंका
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 10 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है जिसके बाद पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य हलचल बहुत तेज हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप की आधिकारिक स्थिति अब भी शून्य संवर्धन की है लेकिन वे कड़े निरीक्षण वाले प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। अगर तेहरान द्वारा दिया गया प्रस्ताव अमेरिकी शर्तों और सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो आने वाले समय में सैन्य कार्रवाई निश्चित है।
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क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं क्योंकि गेंद अब पूरी तरह से तेहरान के पाले में बताई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच अरब सागर में बढ़ती सैन्य मौजूदगी इस बात का संकेत है कि कूटनीति विफल होने पर बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे क्योंकि तनाव का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
भविष्य की कूटनीतिक दिशा
ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव की तलाश में है जिसे ठुकराना ईरान के लिए मुश्किल हो और जिससे अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की पूरी तरह रक्षा हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘टोकन’ संवर्धन का विचार एक बीच का रास्ता हो सकता है जो दोनों देशों को सीधे सैन्य टकराव से बचा सकता है। हालांकि पेंटागन की सैन्य तैयारियों को देखते हुए ईरान को अपनी नीतियों और परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर बहुत ही सोच-समझकर फैसला लेना होगा।
