ईरान की अमेरिका को सीधी चुनौती, 'हमला हुआ तो राख होंगे अमेरिकी सैन्य ठिकाने'; ट्रंप की धमकी पर UN में पलटवार

US Iran Conflict: ट्रंप की 15 दिनों की डेडलाइन के बाद ईरान ने UN में खुली चेतावनी दी है कि हमले की स्थिति में मध्य-पूर्व के सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
Iran directly challenges the US, saying, "If attacked, US military bases will be reduced to ashes"; Trump's threat retaliates at the UN.
ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Threat US: मध्य-पूर्व में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि उस पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया गया तो वह चुप नहीं बैठेगा। ईरान के मुताबिक, ऐसी स्थिति में मध्य-पूर्व क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने, हथियार और संसाधन उसके सीधे निशाने पर होंगे।

ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की प्रतिक्रिया

यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान को परमाणु समझौते के लिए महज 10 से 15 दिनों का समय दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि इस समय सीमा के भीतर समझौता नहीं हुआ तो ईरान को इसके बेहद 'बुरे परिणाम' भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप की इस धमकी ने क्षेत्र में सैन्य हलचल को तेज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने न केवल कड़ा बयान जारी किया, बल्कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद को एक आधिकारिक पत्र भी सौंपा है।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान का कड़ा रुख

ईरान ने अपने पत्र में अमेरिका पर 'गैरकानूनी धमकियां' देने का आरोप लगाया है। ईरान ने सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह युद्ध की पहल नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए वह पूरी तरह तैयार है। ईरान ने अपने बचाव के अधिकार को यूएन चार्टर के आर्टिकल-51 के तहत जायज बताया है जो किसी भी देश को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने की अनुमति देता है।

सैन्य तैयारियों से बढ़ा तनाव

जमीनी स्तर पर भी दोनों देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन जारी है। ईरान ने हाल ही में रूस के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया है, जिसे ट्रंप की सख्ती के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपनी आक्रामक मुद्रा बरकरार रखते हुए मध्य-पूर्व के पास अपना दूसरा विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर दिया है।

इन सैन्य गतिविधियों, तीखे बयानों और ट्रंप की डेडलाइन ने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है। फिलहाल युद्ध की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन जानकारों का मानना है कि माहौल बेहद संवेदनशील है और एक छोटी सी चूक बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है।

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