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Neal Katyal कौन हैं? भारतीय मूल के वकील जिन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ को दी मात

Trump Tariff Ruling: नील कत्याल ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार को चुनौती देकर बड़ी जीत हासिल की है। वह ओबामा प्रशासन में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 21, 2026 | 12:17 PM

एक प्रतिष्ठित वकील और पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Challenges Donald Trump Tariffs: नील कत्याल एक प्रतिष्ठित वकील और पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलों से सबको काफी प्रभावित किया है। उन्होंने राष्ट्रपति के इमरजेंसी कानून के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को चुनौती दी जिससे ट्रंप को कानूनी तौर पर बड़ा झटका लगा है। डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ को चुनौती की इस कानूनी जंग में कोर्ट ने उनके पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए टैरिफ को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारतीय अप्रवासी माता-पिता के बेटे कत्याल अब अमेरिकी न्याय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हलकों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और चर्चित चेहरा बन गए हैं।

नील कत्याल की पृष्ठभूमि

नील कत्याल का जन्म शिकागो में हुआ था और वे भारतीय अप्रवासी माता-पिता की संतान हैं जिनके पिता एक इंजीनियर और उनकी मां डॉक्टर हैं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा डार्टमाउथ कॉलेज और प्रतिष्ठित येल लॉ स्कूल से पूरी की है जो उनकी गहरी कानूनी समझ का मुख्य आधार बनी। करियर की शुरुआत में उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में काम कर कानूनी बारीकियों को करीब से सीखा था।

कोर्ट में दलीलें

कात्याल ने अदालत के सामने मजबूती से दलील दी कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के पास व्यापार को विनियमित करने की असली संवैधानिक शक्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति का मनमाने और गैरकानूनी ढंग से इस्तेमाल कर वैश्विक व्यापार को इस तरह प्रभावित बिल्कुल भी नहीं कर सकते। उनकी इन्हीं सटीक दलीलों के आगे सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा इमरजेंसी कानून के तहत लगाए गए भारी टैरिफ को अवैध मानकर पूरी तरह खारिज कर दिया।

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ओबामा प्रशासन में भूमिका

नील कत्याल ओबामा प्रशासन के दौरान साल 2010 में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल जैसे महत्वपूर्ण और बेहद प्रभावशाली पद पर नियुक्त किए गए थे। इस प्रतिष्ठित भूमिका में उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय न्यायालयों के सामने संघीय सरकार का कुशलतापूर्वक प्रतिनिधित्व कर कई ऐतिहासिक मामलों की पैरवी की थी। वे संवैधानिक और जटिल अपीलीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं और वर्तमान में प्रसिद्ध जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर के पद पर भी कार्यरत हैं।

करियर की उपलब्धियां

अपने शानदार करियर में नील कत्याल ने अब तक 50 से अधिक महत्वपूर्ण मामलों में सर्वोच्च अदालत के भीतर सफलतापूर्वक पैरवी कर अपनी योग्यता साबित की है। उन्होंने 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की वैधता को डिफेंड किया और साल 2017 में ट्रंप के विवादित ट्रैवल बैन को भी कोर्ट में कड़ी चुनौती दी थी। साथ ही उन्होंने मिनेसोटा राज्य में बहुचर्चित जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में विशेष अभियोजक के रूप में काम कर न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाई थी।

सम्मान और लेखनी

नील कत्याल ‘Impeach: The Case Against Donald Trump’ नामक चर्चित किताब के लेखक भी हैं जिसमें उन्होंने ट्रंप के खिलाफ मजबूत कानूनी तर्क पेश किए हैं। उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड’ से नवाजा जा चुका है जो उनकी देश के प्रति उत्कृष्ट सेवा का प्रमाण है। फोर्ब्स ने उन्हें 2024 और 2025 में लगातार अमेरिका के टॉप 200 बेहतरीन वकीलों की प्रतिष्ठित सूची में शुमार कर उनके पेशेवर कद को और बढ़ाया है।

यह भी पढ़ें: टॉयमेकर की ऐतिहासिक जीत: कैसे रिक वोल्डनबर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ को दी मात?

व्यावसायिक जीवन

वर्तमान में वे मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर के रूप में कार्य कर रहे हैं और संवैधानिक कानून के क्षेत्र में लगातार नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्हें ‘द अमेरिकन लॉयर’ द्वारा साल 2017 और 2023 में ‘लिटिगेटर ऑफ द ईयर’ के सर्वोच्च सम्मान से भी दो बार नवाजा जा चुका है। उनकी कानूनी दलीलें न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में व्यापारिक नियमों और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक बड़ी मिसाल के रूप में देखी जाती हैं।

ट्रंप को झटका

सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप काफी गुस्से में हैं क्योंकि उनके वैश्विक टैरिफ प्लान को अदालत ने पूरी तरह गैरकानूनी बताया है। नील कत्याल की इस जीत ने साबित कर दिया है कि कानून की सही व्याख्या से सत्ता के बड़े और मनमाने फैसलों को प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है। यह फैसला आने वाले समय में भारत समेत दुनिया के अन्य देशों के साथ होने वाले अमेरिकी व्यापारिक संबंधों पर बहुत ही गहरा प्रभाव डालेगा।

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Published On: Feb 21, 2026 | 12:17 PM

Topics:  

  • Donald Trump
  • Supreme Court
  • Tariff War
  • World News

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