पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच भारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की सेना ने अहम कदम उठाया है। इस्लामाबाद में बातचीत विफल होने के बाद अब US Iran शांति वार्ता पर सारी दुनिया की नजरें हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक नया ईरान के लिए अमेरिका का संदेश लेकर तेहरान पहुंच गए हैं। इस बड़े कूटनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य रुके हुए मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को फिर से आगे बढ़ाना है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक उच्च स्तरीय डेलिगेशन के साथ ईरान पहुंच गए हैं। उनके साथ इस अहम दौरे पर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी विशेष रूप से मौजूद हैं। तेहरान पहुंचने पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस महत्वपूर्ण डेलिगेशन का बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया।
इससे पहले इस्लामाबाद शहर में US और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक लंबी चर्चा हुई थी। दशकों बाद हुई यह सबसे बड़ी और उच्च स्तरीय बातचीत बिना किसी समझौते के पूरी तरह विफल हो गई। इसी बड़ी नाकामी के बाद दोनों देशों के बीच मध्यस्थता के लिए यह नया और अहम कदम उठाया गया है।
पाकिस्तानी डेलिगेशन का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच अहम संदेशों का सीधा और सुरक्षित आदान-प्रदान करना है। यह विशेष दल बातचीत के एक और नए दौर के लिए सकारात्मक और मजबूत जमीन तैयार कर रहा है। ऐसी पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि शांति वार्ता का यह अगला दौर एक बार फिर इस्लामाबाद में आयोजित किया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने साफ किया है कि शांतिपूर्ण यूरेनियम संवर्धन उनका अधिकार है। हालांकि ईरान ने यह भी स्पष्ट कहा है कि संवर्धन के स्तर और प्रकार पर आसानी से बातचीत की जा सकती है। ईरान ने वार्ता के दौरान रखी गई US की कुछ खास मांगों को पूरी तरह से अतार्किक और अवास्तविक बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी कूटनीतिक मध्यस्थता पर मीडिया में काफी सकारात्मक और अच्छे संकेत दिए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट सुझाव दिया है कि यह विनाशकारी युद्ध अब बहुत जल्द ही पूरी तरह से अपने अंत के करीब आ सकता है। उन्होंने शांति वार्ता में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की शानदार भूमिका की बहुत ज्यादा तारीफ की है।
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एक तरफ शांति की पूरी कोशिशें हो रही हैं वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में सैन्य तैयारियां भी लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने मिडिल-ईस्ट में करीब 10 हजार सैनिक पूरी मुस्तैदी से तैनात कर दिए हैं। पूरी दुनिया इस समय अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले किसी भी नए समझौते का बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रही है।