Israel और लेबनान में सीजफायर पर बनी बात? अमेरिका और ईरान के बीच श्रेय लेने की होड़ शुरू

Israel Lebanon Ceasefire: इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर को लेकर पूरी दुनिया में चर्चाएं तेज हैं। ईरान और अमेरिका दोनों ही देश शांति स्थापना के इस बड़े कदम का पूरा श्रेय लेने की कोशिश में जुटे हैं।
Israel Lebanon Ceasefire Talks: US and Iran Race to Claim Credit 
इजरायल और लेबनान में सीजफायर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Israel Lebanon Ceasefire Agreement: इजरायल और लेबनान के बीच भयंकर युद्ध के बाद अब शांति की नई उम्मीद जगी है। पूरी दुनिया की नजरें अब इजराइल-लेबनान युद्धविराम समझौता पर गहराई से टिकी हुई हैं। कतर की मीडिया के अनुसार ईरान के Israel पर दबाव के कारण ही यह शांति संभव हुई है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका भी मार्को रूबियो की राजनयिक वार्ता के जरिए शांति का पूरा श्रेय लेना चाहता है।

सीजफायर की नई उम्मीद

Israel और लेबनान के बीच लंबे समय से जारी जंग रुकने के साफ संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर शुरुआती सहमति बन गई है। हालांकि इजरायल की कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम और आधिकारिक मोहर लगनी बाकी है।

ईरान और पाकिस्तान का दावा

कतर के अखबार के अनुसार इस अहम शांति समझौते में ईरान और पाकिस्तान की भूमिका है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा को इस संभावित सीजफायर से जोड़ा जा रहा है। ईरान का कहना है कि यह शांति समझौता शुरुआती तौर पर एक हफ्ते के लिए लागू किया जा सकता है।

हिजबुल्लाह का आधिकारिक बयान

लेबनान के प्रमुख समूह हिजबुल्लाह ने भी इस संभावित शांति का पूरा श्रेय ईरान को दिया है। उनका मानना है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके Israel पर भारी कूटनीतिक दबाव बनाया। इसी भारी दबाव के कारण ही इजरायल की सरकार को सीजफायर के लिए राजी होना पड़ा है।

अमेरिका का शांति प्रयास

ईरान के अलावा अमेरिका भी इस शांति प्रक्रिया का पूरा श्रेय लेने में बिल्कुल पीछे नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वॉशिंगटन में Israel और लेबनान के साथ सीधी बातचीत की। साल 1993 के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे बड़ी और पहली उच्च स्तरीय वार्ता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री का लक्ष्य

मार्को रूबियो ने इस पूरी शांति बातचीत को एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक अवसर बताया है। उनका मुख्य मकसद क्षेत्र में पिछले 20-30 साल से मौजूद हिजबुल्लाह के प्रभाव को खत्म करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लेबनान के आम लोग हिजबुल्लाह और ईरान की नीतियों का शिकार हुए हैं।

लेबनान सरकार का रुख

सीजफायर के इन सभी दावों के बीच लेबनान की सरकार ने अपना अलग और स्पष्ट रुख रखा है। लेबनान सरकार का कहना है कि वे अपनी तरफ से सीजफायर पर बात करने में पूरी तरह सक्षम हैं। लेबनान के अंदर रहने वाले सुन्नी और ईसाई समुदाय के लोग भी हिजबुल्लाह का कड़ा विरोध करते हैं।

दक्षिण लेबनान की स्थिति

इजरायल के ज्यादातर और सबसे बड़े सैन्य हमले लेबनान के दक्षिणी इलाकों में ही हो रहे हैं। इन भारी हमलों के कारण दक्षिणी क्षेत्र के हजारों आम लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा है। बेरूत शहर में बहुत से लोग आज भी एक साधारण रिफ्यूजी की तरह अपना जीवन बिता रहे हैं।

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