US THAAD Interceptor: ईरान से जंग में अमेरिका का आधा भंडार खत्म, इजरायल को बचाने के लिए दागे ज्यादा मिसाइल

US THAAD Interceptor: ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपने आधे रक्षा भंडार का इस्तेमाल किया है। इजरायल की सुरक्षा के लिए 200 से अधिक मिसाइल दागे, जिससे अब स्टॉक घट गया है और इस बात से तनाव बढ़ा है।
US THAAD Interceptor: US Depletes Half Its Stockpile Defending Israel From Iran
अमेरिका का मिसाइल भंडार आधा खत्म (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US THAAD Interceptor News: मध्य-पूर्व के क्षेत्र में ईरान और इजरायल के बीच हाल ही में रुकी भयंकर जंग को लेकर अब एक बहुत ही बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा पूरी दुनिया के सामने आया है। प्रतिष्ठित अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इजरायल की रक्षा करने के लिए अपने लगभग आधे एडवांस एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम का भारी इस्तेमाल कर लिया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि इजरायल को बचाने की खातिर अमेरिका ने अपने सुरक्षित भंडार से 200 से ज्यादा इंटरसेप्टर दागे हैं। यह बहुत बड़ा आंकड़ा पेंटागन के कुल मिसाइल स्टॉक का करीब आधा हिस्सा माना जा रहा है, जो अमेरिका की भविष्य की सैन्य तैयारियों पर असर डालेगा।

इस विस्तृत रिपोर्ट में यह भी कड़ा दावा किया गया है कि पूर्वी भूमध्य सागर में पूरी तरह तैनात अमेरिकी नेवी के बड़े जहाजों से भी भारी गोलाबारी की गई है। वहां मौजूद सैन्य बेड़े से 100 से अधिक स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 इंटरसेप्टर दागे गए थे, जो कि एक बहुत ही बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।

यह साफ दिखाता है कि अमेरिका ने इजरायल की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी सैन्य ताकत और संसाधन एक साथ झोंक दिए थे। इस भारी बमबारी की वजह से अमेरिका के पास मौजूद मिसाइलों का सुरक्षित भंडार बहुत तेजी से घट गया है, जिससे रक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिका का इजरायल के लिए मिसाइल उपयोग

इतनी बड़ी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तुलना में इजरायल ने अपनी हवाई रक्षा के लिए काफी कम मिसाइलों का ही सीधे तौर पर इस्तेमाल किया है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 100 से कम एरो इंटरसेप्टर और लगभग 90 डेविड स्लिंग इंटरसेप्टर का ही सीमित उपयोग अपनी सुरक्षा के लिए किया। इनमें से कुछ मिसाइलों का खास इस्तेमाल लेबनान और यमन में सक्रिय ईरान समर्थित गुटों के छोटे हमलों को हवा में रोकने के लिए भी किया गया।

अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों के साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका ने इजरायल के मुकाबले कुल मिलाकर करीब 120 ज्यादा इंटरसेप्टर दागे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि खतरनाक ईरानी मिसाइलों को हवा में ही रोकने के लिए अमेरिका ने इजरायल से दोगुना ज्यादा कड़ा सैन्य एक्शन लिया है। इस अप्रत्याशित गोलाबारी से उसके बचे हुए मिसाइल भंडार को लेकर अब अमेरिकी सेना के सामने एक नई और बहुत बड़ी सैन्य चुनौती खड़ी हो गई है।

भविष्य की सैन्य कार्रवाई

इस मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आने वाले दिनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद फिर से सैन्य एक्शन शुरू होता है। तो अमेरिकी सेना को अपने सहयोगी की रक्षा करते हुए ईरान के खिलाफ और भी ज्यादा घातक इंटरसेप्टर लगातार दागने पड़ सकते हैं। यह युद्ध की स्थिति में लगातार घटते अमेरिकी मिसाइल भंडार के लिए भविष्य में बहुत ही गहरी और गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

इस पूरे विवाद के संदर्भ में यह गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बहुत ही कड़ा सैन्य एक्शन शुरू किया था। उस जोरदार और अचूक हवाई हमले में तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई सहित ईरान के कई अन्य टॉप नेता भी मारे गए थे। हालांकि राहत की बात यह है कि 8 अप्रैल से लागू सीजफायर के बाद फिलहाल यह भारी संघर्ष पूरी तरह रुका हुआ है और शांति वार्ता चल रही है।

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