अमेरिकी अदालतों का बड़ा फैसला, हिरासत में बंद भारतीयों को मिली राहत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Relief For Detained Indian Nationals: अमेरिका के विभिन्न राज्यों की अदालतों ने इस सप्ताह इमिग्रेशन डिटेंशन में रखे गए भारतीय नागरिकों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसले सुनाकर उन्हें एक नई उम्मीद दी है। इन फैसलों के तहत कैलिफोर्निया, मिशिगन और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में बंद कई भारतीयों को बॉन्ड पर रिहाई या दोबारा सुनवाई का अधिकार मिला है। जजों ने माना कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने इन लोगों को हिरासत में रखने के दौरान विधिक प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया था। न्याय की यह जीत उन परिवारों के लिए एक मरहम की तरह है जो अपनों की रिहाई के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
सैन डिएगो की अदालत ने हरबीत सिंह की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सात दिनों के भीतर बॉन्ड सुनवाई का आदेश दिया है ताकि उनकी हिरासत की समीक्षा हो सके। जज ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस आधार के किसी को लंबे समय तक कैद में रखना विधिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है और यह न्यायोचित नहीं है। मिशिगन में भी सागर राम को राहत मिली है जहां कोर्ट ने सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्हें अनिवार्य रूप से हिरासत में रखने की बात कही गई थी।
न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन कोर्ट ने हरमनप्रीत सिंह के मामले में सरकार को निर्देश दिया कि वह पुख्ता सबूत पेश करे कि वे समुदाय के लिए खतरा हैं या नहीं। जज ने टिप्पणी की कि बिना सही सुरक्षा उपायों के किसी को हिरासत में रखना अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन का उल्लंघन माना जाता है जिससे नागरिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं। इसी तरह ओक्लाहोमा में करनदीप सिंह की हिरासत को बॉन्ड के योग्य श्रेणी में मानते हुए अदालत ने तुरंत उनकी सुनवाई करने का आदेश जारी किया है।
कैलिफोर्निया में भवानदीप सिंह ढालीवाल को कोर्ट ने तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और अधिकारियों को उन्हें दोबारा बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार करने से रोक दिया। वहीं विक्रांत सिंह को भी पिछली रिहाई की शर्तों के तहत तुरंत आजादी मिली है जो उनके और उनके करीबियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशी की बात है। हालांकि गुरप्रीत वालिया सिंह जैसे कुछ बंदियों की याचिकाएं खारिज भी हुईं क्योंकि उनकी हिरासत को कोर्ट ने कानून के मुताबिक सही पाया।
Ans: अदालत ने सात दिनों के भीतर उनकी व्यक्तिगत बॉन्ड सुनवाई कराने और सरकार को हिरासत के ठोस सबूत पेश करने का आदेश दिया है।
Ans: जज ने कहा कि सही सुरक्षा उपायों के बिना लगातार हिरासत में रखना अमेरिकी संविधान के 5वें संशोधन का स्पष्ट उल्लंघन है।
Ans: नहीं, गुरप्रीत वालिया सिंह की याचिका खारिज कर दी गई क्योंकि अदालत ने उनकी हिरासत को कानून और संविधान के अनुरूप पाया।
Ans: कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया और अधिकारियों को उन्हें बिना सही कानूनी प्रक्रिया के दोबारा गिरफ्तार करने से मना किया।
Ans: अदालत ने कहा कि उनकी हिरासत धारा 1226(ए) के तहत आती है जो बॉन्ड की अनुमति देती है, न कि अनिवार्य हिरासत के तहत।