सऊदी अरब का अमेरिका से मोह भंग! होमुर्ज की नाकेबंदी पर ट्रंप को खरी-खरी सुनाया, कहा-आपसे नहीं हो रहा है तो…
Saudi Arabia के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने अमेरिका पर निर्भरता खत्म करने का बड़ा ऐलान करते हुए ट्रंप प्रशासन की सुरक्षा नीतियों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर तीखे सवाल उठाए हैं।
- Written By: अक्षय साहू
अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से सऊदी अरब नाराज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Saudi Slams US Over Iran War: सऊदी अरब (Saudi Arabia) के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने का दौर खत्म हो चुका है। फरहान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जब अमेरिका अपने ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, तो वह सऊदी अरब की रक्षा कैसे करेगा।
फरहान के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों और अमेरिका पर घटती निर्भरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ तनाव और संघर्ष के दौरान सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
सऊदी में मौजूद सैन्य ठिकानों पर हमले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) में मौजूद सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से सऊदी की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा, क्योंकि तेल निर्यात प्रभावित हुआ। सऊदी की ऑयल रिफाइनरियों पर हुए हमलों के दौरान भी अमेरिका की सीमित प्रतिक्रिया ने रियाद के भरोसे को कमजोर किया।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने अमेरिका पर दबाव डाला है कि वह होर्मुज क्षेत्र में अपनी नौसैनिक घेराबंदी खत्म करे और कूटनीतिक बातचीत की राह अपनाए। खाड़ी देशों को आशंका है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो ईरान जवाबी कार्रवाई में वैकल्पिक समुद्री मार्गों को भी बाधित कर सकता है। फिलहाल सऊदी अरब अपने तेल निर्यात के लिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन बढ़ते तनाव से यह मार्ग भी खतरे में पड़ सकता है।
उतार-चढ़ाव से भरा दोनों देशों का रिश्ता
अमेरिका-सऊदी संबंधों का इतिहास हाल के वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। बराक ओबामा प्रशासन के दौरान 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) को सऊदी ने अपने लिए खतरा माना था। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने पर दोनों देशों के संबंधों में सुधार हुआ। 2017 में ट्रंप ने अपना पहला विदेश दौरा सऊदी अरब से शुरू किया और बड़े रक्षा समझौते किए, जिनकी कुल कीमत करीब 350 अरब डॉलर बताई जाती है।
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हालांकि, मौजूदा हालात में सऊदी अरब (Saudi Arabia) का रुख बदलता नजर आ रहा है। जो अमेरिका कभी उसका सबसे बड़ा सुरक्षा साझेदार था, अब उसी पर सवाल उठ रहे हैं। यह बदलाव न केवल मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और रणनीतिक समीकरणों पर भी इसका दूरगामी असर पड़ सकता है।
