WW2 जैसी तैयारी! अमेरिका ने अपनी कार कंपनियों को बनाया हथियारों का कारखाना, पेंटागन की बड़ी डील
US Automakers Pentagon Weapons: वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी दिग्गज ऑटो कंपनियों को सैन्य शक्ति बढ़ाने का जिम्मा सौंपा है। जनरल मोटर्स और फोर्ड अब पेंटागन के लिए हथियारों का उत्पादन करेंगी।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Automakers Pentagon Weapons Production: दुनिया भर में बढ़ते युद्ध के खतरों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन (Pentagon) ने देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों जनरल मोटर्स (GM) और फोर्ड (Ford) को सैन्य साजो-सामान और हथियारों के उत्पादन के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं।
यह कदम दर्शाता है कि अमेरिका अपनी सैन्य तैयारियों को ‘वॉर मोड’ में ले जा रहा है जहां नागरिक उद्योगों का इस्तेमाल युद्ध की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
द्वितीय विश्व युद्ध की यादें हुई ताजा
इतिहासकारों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के उस दौर की याद दिलाती है जब अमेरिका को ‘लोकतंत्र का शस्त्रागार’ (Arsenal of Democracy) कहा जाता था। उस समय भी इन्हीं दिग्गज कंपनियों ने कार बनाना बंद कर टैंक, फाइटर प्लेन और बमवर्षक विमानों का निर्माण शुरू किया था। वर्तमान में यूक्रेन, मिडिल ईस्ट और ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेंटागन एक बार फिर उसी मॉडल को अपना रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
Malviya Nagar Fire Accident: दिल्ली होटल अग्निकांड को लेकर वर्ल्ड मीडिया ने सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल
रूस के मिसाइल तांडव से दहला यूक्रेन! बच्चों समेत 22 की मौत, जेलेंस्की ने यूरोप से लगाई गुहार
US का भारत समेत 60 देशों पर ‘टैरिफ बम’! ट्रेड डील के बीच ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला; जबरन मजदूरी का लगाया आरोप
ईरान संकट पर अमेरिका का बड़ा खुलासा: चीन ने नहीं दी कोई सैन्य मदद, रुबियो ने बीजिंग से की समर्थन की अपील
पेंटागन के साथ अरबों डॉलर के करार
स्रोतों के अनुसार, पेंटागन ने इन कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। जनरल मोटर्स की विशेष इकाई ‘जीएम डिफेंस’ को पहले ही इन्फैंट्री स्क्वाड वाहन (ISV) बनाने का काम सौंपा जा चुका है। ये वाहन ऊबड़-खाबड़ इलाकों में सैनिकों को तेजी से ले जाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
वहीं, फोर्ड और अन्य कंपनियां उन्नत रसद (Logistics) और विशेष सैन्य इंजनों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यह केवल वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि भविष्य की सैन्य तकनीक जैसे स्वायत्त वाहन और सैन्य ग्रेड की बैटरी तकनीक पर भी काम किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहन और सैन्य भविष्य
इस बार की सैन्य लामबंदी (Mobilization) में एक नया पहलू ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ का भी है। अमेरिकी सेना अपने बेड़े को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदलने की योजना बना रही है ताकि युद्ध क्षेत्र में ईंधन की निर्भरता को कम किया जा सके और सैन्य ठिकानों की गोपनीयता बढ़ाई जा सके (क्योंकि इलेक्ट्रिक इंजन कम शोर करते हैं)। जीएम और फोर्ड, जो पहले से ही ईवी बाजार में अग्रणी हैं इस तकनीक को सैन्य मानकों के अनुरूप ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- चीन की ईरान को दोटूक: ‘होर्मुज’ का रास्ता खोलो वरना डूबेगी दुनिया की इकोनॉमी, तेल संकट पर मची खलबली
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव
अमेरिका का यह कदम चीन और रूस जैसी प्रतिस्पर्धी ताकतों के लिए एक कड़ा संदेश है। अपनी औद्योगिक क्षमता को सैन्य शक्ति में बदलने की यह कवायद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर कार निर्माता कंपनियां अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा हथियारों के लिए समर्पित करती हैं तो भविष्य में नागरिक वाहनों की कीमतों और उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल, पेंटागन का मुख्य लक्ष्य किसी भी बड़े वैश्विक संघर्ष की स्थिति में अपनी मारक क्षमता को कम समय में कई गुना बढ़ाना है।
