दक्षिण सूडान के जुबा हवाई अड्डे पर खड़ा एक विमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Saudi UAE Tension: सूडान में अप्रैल 2023 से जारी खूनी गृहयुद्ध के बीच संयुक्त अरब अमीरात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कटघरे में खड़ा है। ताज़ा रिपोर्टों और सैन्य गतिविधियों के अनुसार, यूएई से जुड़े एक विशाल कार्गो विमान की संदिग्ध आवाजाही ने सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्स को गुप्त रूप से हथियार सप्लाई करने के दावों को पुख्ता किया है।
सूडान के इस भीषण संघर्ष में अब तक लगभग 1.5 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और यूएई पर इस नरसंहार में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा भी चल रहा है।
संदेह के घेरे में आया विमान Antonov An-124 (पंजीकरण: UR-ZYD) है जो ‘मैक्सिमस एयर’ नामक कंपनी द्वारा संचालित किया जाता है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह कंपनी सीधे तौर पर यूएई सरकार और शेख मोहम्मद बिन जायद से जुड़ी हुई है। हाल ही में इस विमान को अबू धाबी, इजरायल, बहरीन और इथियोपिया के सैन्य अड्डों के बीच उड़ान भरते देखा गया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह विमान इतना विशाल है कि इसमें भारी वाहन और हेलीकॉप्टर आसानी से ले जाए जा सकते हैं। इससे पहले भी इस विमान का इस्तेमाल लीबिया में हफ्तार समूह को सैन्य मदद पहुंचाने के लिए किया गया था। अब इसके जरिए सूडान के RSF को आधुनिक हथियार और फाइटर जेट सप्लाई करने के संकेत मिले हैं।
संघर्ष सूडान की जंग ने खाड़ी क्षेत्र के दो सबसे बड़े दिग्गजों, सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। जहां एक तरफ सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये आधिकारिक सूडानी सेना का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं, वहीं यूएई विद्रोही गुट RSF के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
इस तनाव का असर अन्य क्षेत्रों में भी दिख रहा है सऊदी अरब अब पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मिलकर एक नया और मजबूत सैन्य गठबंधन बनाने की तैयारी में है जिसे यूएई के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
यूएई का करीबी सहयोगी इथियोपिया इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यूएई ने अपनी नई रणनीति के तहत अपने सैनिकों को इथियोपिया भेजा है और यह कार्गो विमान अक्सर इथियोपिया के हरार मेडा एयरपोर्ट पर उतरता देखा गया है।
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हालांकि, यूएई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और सूडान में हथियार भेजने की बात से इनकार किया है। बावजूद इसके, सूडान में जारी हिंसा और खाड़ी देशों के बीच का यह ‘कोल्ड वॉर’ पूरे अफ्रीका और अरब जगत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।