ईरान के हमले में गिरी मकान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Abu Dhabi Missile Attack: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा भीषण संघर्ष अब निर्दोष नागरिकों के लिए काल बनने लगा है। युद्ध के 27वें दिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में एक दर्दनाक हादसा हुआ है जिसने खाड़ी देशों में रह रहे विदेशी प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार सुबह एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने के बाद उसके गिरते हुए मलबे की चपेट में आने से दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई।
अबू धाबी मीडिया कार्यालय द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार, मारे गए दो लोगों की पहचान कर ली गई है। इनमें से एक भारत का और दूसरा पाकिस्तान का नागरिक था। अधिकारियों ने बताया कि यूएई के सुरक्षा तंत्र ने आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट तो कर लिया लेकिन हवा में हुए धमाके के बाद मिसाइल के भारी टुकड़े रिहायशी इलाकों के पास गिरे।
इस हादसे में तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं जिनमें एक भारतीय, एक जॉर्डन का नागरिक और एक अमीराती शामिल है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है जहां कुछ की हालत सामान्य तो कुछ की गंभीर बताई जा रही है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच यह संघर्ष अब लगभग एक महीने (27 दिन) से जारी है। ईरान लगातार उन खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद हैं। तेहरान ने खुलेआम चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिकी जमीनी सेना की सीधी मदद करेंगे वे उसके निशाने पर रहेंगे।
हालांकि, यूएई सहित कई खाड़ी देशों ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि वे इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन भौगोलिक स्थिति और अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के कारण वे इस युद्ध की लपेट में आ रहे हैं।
यूएई में ईरानी हमलों के कारण मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार की घटना को मिलाकर अब तक कुल 10 लोग मारे जा चुके हैं। इससे पहले 21 मार्च (शनिवार) को भी यूएई के रक्षा मंत्रालय ने आठ लोगों की मौत की पुष्टि की थी जिनमें सेना के दो जवान और छह आम नागरिक (पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और फिलिस्तीन से) शामिल थे।
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हादसे के बाद अबू धाबी के मीडिया कार्यालय ने लोगों को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी है। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि भले ही एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों को नष्ट कर रहा है लेकिन उनका मलबा अभी भी जमीन पर मौजूद लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि यह संघर्ष नहीं थमा, तो खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों एशियाई प्रवासियों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो जाएगी।